रंग-तरंग’ में गूंजेंगी छत्तीसगढ़ की लोकधुनें, संस्कृति और आधुनिक सुरों का संगम-1 से 3 सितंबर तक मुक्ताकाशी मंच पर तीन दिवसीय आयोजन, पारंपरिक लोक वाद्ययंत्रों की प्रस्तुतियां रहेंगी खास आकर्षण

रंग-तरंग’ में गूंजेंगी छत्तीसगढ़ की लोकधुनें, संस्कृति और आधुनिक सुरों का संगम-1 से 3 सितंबर तक मुक्ताकाशी मंच पर तीन दिवसीय आयोजन, पारंपरिक लोक वाद्ययंत्रों की प्रस्तुतियां रहेंगी खास आकर्षण

रायपुर, 31अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक संगीत और आधुनिक सुरों के अनूठे संगम को मंच प्रदान करने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ‘रंग-तरंग’ सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। तीन दिवसीय यह आयोजन 1, 2 एवं 3 सितंबर 2026 को प्रतिदिन शाम 7 बजे से रायपुर के मुक्ताकाशी मंच, महंत घासीदास संग्रहालय परिसर, सिविल लाइंस में होगा। ‘रंग-तरंग’ के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता को नए और आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत किया जाएगा। कार्यक्रम में पारंपरिक लोक वाद्ययंत्रों की प्रस्तुतियों के साथ संगीत की विभिन्न विधाओं का संगम देखने और सुनने को मिलेगा। इसका उद्देश्य प्रदेश की लोक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ उन्हें समकालीन संगीत से जोड़कर व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाना है।
लोक वाद्यों की गूंज के साथ सजेगी सुरों की महफिल
‘रंग-तरंग’ को संस्कृति, रंग और सुरों के फ्यूजन के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। आयोजन में छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं से जुड़े पारंपरिक वाद्ययंत्रों और कलाकारों की प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी। लोक वाद्यों की पारंपरिक धुनों के साथ आधुनिक संगीत का मेल दर्शकों को प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का नया और आकर्षक अनुभव कराएगा।
लोक संस्कृति को मिलेगा नया मंच
तीन दिवसीय आयोजन में छत्तीसगढ़ की विविध लोक परंपराओं, संगीत शैलियों और वाद्य संस्कृति को एक मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा। प्रदेश की पहचान उसकी जीवंत लोक कलाओं और समृद्ध संगीत परंपराओं से रही है। ऐसे आयोजनों से स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलने के साथ ही युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलता है। संस्कृति विभाग की यह पहल लोक और आधुनिकता के मेल के जरिए दर्शकों को मनोरंजन के साथ छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को करीब से जानने का अवसर देगी। तीन दिनों तक चलने वाला यह आयोजन रायपुरवासियों सहित कला और संस्कृति में रुचि रखने वाले दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा।
‘रंग-तरंग’ छत्तीसगढ़ की लोकधुनों, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और आधुनिक संगीत को एक मंच पर लाकर प्रदेश की संस्कृति के विविध रंगों को सुरों की तरंगों में पिरोने की अनूठी पहल होगी

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