
रायपुर। बस्तर संभाग के स्थानीय युवाओं को पुलिस सेवा से जोड़ने के लिए बस्तर फाइटर्स में 4,600 आरक्षकों की सीधी भर्ती की जाएगी। भर्ती की सबसे खास बात यह है कि स्थानीय भाषा और बोली का ज्ञान रखने वाले अभ्यर्थियों को 20 बोनस अंक दिए जाएंगे। गृह विभाग ने भर्ती नियमावली तैयार कर ली है। अब पुलिस मुख्यालय की ओर से भर्ती का अलग से विज्ञापन जारी किया जाएगा। भर्ती में आवेदन करने के लिए अभ्यर्थी का संबंधित जिले का स्थानीय निवासी होना अनिवार्य होगा। सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 10वीं पास, जबकि एसटी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 5वीं पास योग्यता निर्धारित की गई है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के नक्सल पीड़ित परिवारों और राहत शिविरों में रहने वाले परिवारों के सभी वर्गों के अभ्यर्थी भी 5वीं पास होने पर भर्ती के लिए पात्र होंगे।
18 से 28 वर्ष तक के युवा कर सकेंगे आवेदन
अभ्यर्थियों की आयु 18 से 28 वर्ष के बीच होनी चाहिए। एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों को अधिकतम आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट मिलेगी। इसके अलावा महिलाओं, पूर्व सैनिकों, नगर सैनिकों और संविदा कर्मचारियों को नियमानुसार अतिरिक्त आयु छूट का लाभ दिया जाएगा।
शारीरिक दक्षता के बाद लिखित परीक्षा
चयन प्रक्रिया कुल 200 अंकों की होगी। इसमें शारीरिक दक्षता परीक्षा और लिखित परीक्षा को प्रमुख आधार बनाया गया है। शारीरिक दक्षता परीक्षा 100 अंकों की होगी। इसमें लंबी कूद, ऊंची कूद, गोला फेंक तथा 100 मीटर और 800 मीटर दौड़ जैसी स्पर्धाएं शामिल रहेंगी। शारीरिक परीक्षा में सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को न्यूनतम 60 प्रतिशत, जबकि एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों को 50 प्रतिशत अंक हासिल करना जरूरी होगा। इसके आधार पर मेरिट तैयार कर अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा के लिए चयनित किया जाएगा।
लिखित परीक्षा में स्थानीय भूगोल और संस्कृति पर सवाल
लिखित परीक्षा में सामान्य ज्ञान, बुद्धि-विवेक, स्थानीय भूगोल एवं संस्कृति और अंकगणित से संबंधित प्रश्न पूछे जाएंगे। लिखित परीक्षा के बाद मेरिट के आधार पर तीन गुना अभ्यर्थियों को आगे की प्रक्रिया के लिए बुलाया जाएगा। इसके बाद 20 अंकों का इंटरव्यू होगा। स्थानीय भाषा-बोली का ज्ञान रखने वाले अभ्यर्थियों को अतिरिक्त 20 बोनस अंक दिए जाएंगे।
स्थानीय महिलाओं और होमगार्ड्स को आरक्षण
भर्ती में स्थानीय वर्गों को निर्धारित प्रावधानों के अनुसार आरक्षण का लाभ मिलेगा। स्थानीय महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत, तीन वर्ष की सेवा पूरी कर चुके होमगार्ड्स के लिए 25 प्रतिशत और भूतपूर्व सैनिकों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान रखा गया है। चयनित जवानों को नई पेंशन व्यवस्था के तहत एनपीएस या यूपीएस (एकीकृत पेंशन योजना) में से किसी एक विकल्प को चुनने का अधिकार भी दिया जाएगा।
स्थानीय युवाओं को भर्ती में प्राथमिकता के पीछे चार प्रमुख कारण
भौगोलिक समझ: बस्तर के घने जंगलों, पहाड़ी क्षेत्रों और दुर्गम इलाकों की स्थानीय युवाओं को बेहतर जानकारी होती है। इससे सुरक्षा अभियानों के दौरान उन्हें क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों का लाभ मिल सकता है।
स्थानीय बोली में संवाद: गोंडी और हलबी जैसी स्थानीय बोलियों में ग्रामीणों से संवाद करने में स्थानीय जवान अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं। इससे पुलिस और स्थानीय समुदाय के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करने में मदद मिलेगी।
मुख्यधारा से जुड़ाव: 5वीं और 10वीं पास स्थानीय युवाओं तथा नक्सल प्रभावित परिवारों के सदस्यों को पुलिस सेवा में अवसर देकर उन्हें रोजगार और मुख्यधारा से जोड़ना भर्ती का अहम उद्देश्य है।
बेहतर स्थानीय इंटेलिजेंस: बस्तर के सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश से जुड़े स्थानीय जवान ग्रामीणों के साथ बेहतर तालमेल बना सकते हैं। इससे क्षेत्र से जुड़ी महत्वपूर्ण सूचनाएं पुलिस तक तेजी से पहुंचाने में मदद मिल सकती है। बस्तर फाइटर्स की इस बड़े पैमाने की भर्ती से स्थानीय युवाओं को रोजगार का अवसर मिलने के साथ-साथ बस्तर के संवेदनशील और दुर्गम क्षेत्रों में पुलिस व्यवस्था को स्थानीय स्तर पर मजबूत करने की उम्मीद है।