विवेकानंद जयंती पर बेल्हारी में हिन्दू सम्मेलन एवं युवा महोत्सव, छत्तीसगढ़िया लोककला की प्रस्तुति और योगकला के प्रदर्शन ने बांधा समां ! मुख्य वक्ता रुपनारायण बोले -योग, संस्कार और सेवा से सशक्त होगा समाज

विवेकानंद जयंती पर बेल्हारी में हिन्दू सम्मेलन एवं युवा महोत्सव, छत्तीसगढ़िया लोककला की प्रस्तुति और योगकला के प्रदर्शन ने बांधा समां ! मुख्य वक्ता रुपनारायण बोले -योग, संस्कार और सेवा से सशक्त होगा समाज

जामगांव आर। समाजसेवी संस्था युवा मित्र मंडल द्वारा स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर ग्राम बेल्हारी में हिन्दू सम्मेलन सह छत्तीसगढ़िया लोककला एवं युवा महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लोकसंस्कृति, योग और युवा चेतना का सुंदर संगम देखने को मिला। आयोजन के दौरान लोकगाथा भरथरी, रामधूनी, फाग, कर्मा, ददरिया जैसी पारंपरिक छत्तीसगढ़िया लोककलाओं की मनमोहक प्रस्तुतियों के साथ पुरखा के सुरता एवं रंगमया लोककला दल की प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण नेशनल ओलम्पियाड में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करने वाली भानपुरी योगाश्रम की दर्जनभर बालिकाओं एवं बालकों द्वारा प्रस्तुत योगकला रही। बच्चों ने सामूहिक योगासन, संतुलन और लयबद्ध योग प्रदर्शन से उपस्थित जनसमूह की भरपूर तालियाँ बटोरीं। समारोह का संचालन संयोजक मनीष चंद्राकर ने किया। आयोजन के अंत में अतिथियों एवं कलाकारों का सम्मान कर अध्यक्ष भूषण चंद्राकर ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर यादमल गोलछा, प्रदीप तोमर, सनत शर्मा, हलधर महमल्ला,उत्तम रिगरी, अनिल शर्मा,मोहित निषाद, इशू बंसोड, संदीप शर्मा, अमित राठी, रामसिंह बंसोड, सुरेश बंछोर, भेन चंद्राकर, रूप सिंह सिन्हा, ताराचंद महतो, बीसहत साहू, अभिषेक सेन, मोहनीश प्रजापति, संतोष लहरे, कुंदन सिन्हा, लूभम बंछोर, भेन चंद्राकर,महेश साहू, अंकित शुक्ला, आंनद बंसोड, मुकेश साहू, शिव साहू, हरिश्चन्द्र साहू,सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं ग्रामवासी उपस्थित रहे।

• भारतीय संस्कृति और योग को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बना आयोजन

हिन्दू सम्मेलन एवं युवा महोत्सव के मुख्य वक्ता छत्तीसगढ़ योग आयोग के अध्यक्ष रूपनारायण सिन्हा रहे। उन्होंने अपने उद्बोधन में स्वामी विवेकानंद के विचारों और हिन्दू दर्शन को रेखांकित करते हुए कहा कि “विवेकानंद के आदर्श आज भी युवाओं को आत्मबल, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा देते हैं। योग और संस्कृति से जुड़कर ही स्वस्थ और संस्कारित समाज का निर्माण संभव है। श्री सिन्हा ने कहा कि हिन्दू दर्शन केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन को संयम, करुणा और कर्मयोग से जोड़ने की प्रेरणा देता है। युवाओं को अपनी संस्कृति और लोकपरंपराओं से जुड़कर समाज निर्माण में भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से भारतीय संस्कृति, योग और सनातन मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम मिलता है। समाजसेवी गोपाल टावरी ने गौसेवा एवं ग्रामीण जीवन संस्कृति को बढ़ावा देने पर बल दिया। कार्यक्रम में कबीर आश्रम के संत सत्यकर साहेब,आयोग की सचिव संगीता सिंह, आर्य समाज प्रमुख योगिराज साहू, वरिष्ठ योगाचार्य सी.एल. सोनवानी एवं छबिराम साहू, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष चंद्रहास देवांगन, सामाजिक कार्यकर्ता हलधर महमल्ला एवं नेतराम निषाद विशेष रूप से उपस्थित रहे।

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