अयोध्या से मायके चंद्रखुरी आएंगी माता कौशल्या, तीजा पर्व पर फिर जीवंत होगी रामायण कालीन परंपरा

रायपुर। छत्तीसगढ़ की पावन भूमि एक बार फिर रामायणकालीन परंपराओं की साक्षी बनने जा रही है। अयोध्या से माता कौशल्या का प्रतीकात्मक मायके आगमन इस वर्ष भी तीजा पर्व के अवसर पर भव्य रूप से सम्पन्न होगा। यह आयोजन अब सांस्कृतिक परंपरा के रूप में स्थापित हो चुका है, जो नारी सम्मान, मातृ शक्ति और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को समर्पित है। छत्तीसगढ़ राज्य सांस्कृतिक परिषद द्वारा संरक्षित इस परंपरा के अंतर्गत 1 अगस्त को संस्था के निदेशक राकेश तिवारी के निर्देशन में वरिष्ठ सांस्कृतिकजन डॉ. पुरुषोत्तम चंद्राकर एवं राजेश शर्मा अयोध्या से माता कौशल्या के प्रतीक रूप को लिवाने विधिवत पूजा-अर्चना के साथ अयोध्या रवाना हुए।

पुरातन परंपराओं के साथ अयोध्या रवानगी

अयोध्या जाने से पूर्व श्रीमती प्रथा यादव द्वारा पारंपरिक रीति से अंगाकर रोटी, गुड़, अचार देकर विदा किया गया। अयोध्या में ये प्रतिनिधि दशरथ भवन से राजा दशरथ की प्रतीकात्मक अनुमति लेकर, पूजा-अर्चना कर पवित्र मिट्टी साथ लाएंगे।

मूर्ति निर्माण और स्थापना का कार्यक्रम

4 अगस्त: अयोध्या से लाई गई मिट्टी का रायपुर रेलवे स्टेशन में गाजे-बाजे के साथ स्वागत।

5 अगस्त: प्रसिद्ध मूर्तिकार पीलूराम साहू को मूर्ति निर्माण हेतु मिट्टी सौंपा जाएगा, जो निमोरा में माता कौशल्या और भगवान राम की मूर्ति गढ़ेंगे।

22 अगस्त: मूर्ति को चंद्रखुरी ले जाया जाएगा।

23 अगस्त: मूर्ति स्थापना की जाएगी।

24-26 अगस्त: तीजा पर्व की रस्में, पारंपरिक रीति-रिवाज, सांस्कृतिक कार्यक्रम संपन्न होंगे।

27 अगस्त: बासी-लुगरा रस्म के साथ माता कौशल्या को भव्य शोभायात्रा के जरिए अयोध्या विदा किया जाएगा।

यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता और मातृशक्ति के सम्मान का प्रतीक बन चुका है। राम वनगमन पथ को जीवंत बनाए रखने की यह पहल छत्तीसगढ़ को धार्मिक और सांस्कृतिक मानचित्र पर विशेष स्थान दिला रही है।

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