
रायपुर/भिलाई। दुर्ग में टाइप-1 डायबिटीज से जूझ रहे बच्चों के इलाज से जुड़ी एक गंभीर समस्या सामने आई है। जिला अस्पताल स्थित जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र (DEIC) में बच्चों को मुफ्त इंसुलिन, इंसुलिन-पेन और ग्लूकोमीटर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, लेकिन पेन में लगने वाली निडिल (सुई) की नियमित आपूर्ति नहीं हो पा रही है। बताया जा रहा है कि फरवरी से अस्पताल के मेडिसिन स्टोर में इंसुलिन और इंसुलिन-पेन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं, लेकिन निडिल का स्टॉक नहीं है। ऐसे में बच्चों के परिजनों को बाजार से निडिल खरीदनी पड़ रही है।
DEIC के रिकॉर्ड में 86 बच्चे, विभागीय आंकड़ा 28
DEIC के रिकॉर्ड के अनुसार दुर्ग में टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित 86 बच्चे पंजीकृत हैं। दावा किया जा रहा है कि किसी एक केंद्र पर पंजीकृत टाइप-1 डायबिटीज बच्चों की यह संख्या देश में सबसे अधिक है। हालांकि, RBSK की जिला नोडल अधिकारी डॉ. दिव्या श्रीवास्तव ने ऐसे बच्चों की संख्या 28 बताई है। इससे विभागीय रिकॉर्ड और अधिकारी द्वारा बताए गए आंकड़ों में बड़ा अंतर सामने आ रहा है। टाइप-1 डायबिटीज में शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता। ऐसे में मरीज को बाहर से नियमित इंसुलिन देना जरूरी होता है। DEIC में पंजीकृत बच्चों की उम्र करीब 2 से 18 वर्ष के बीच बताई गई है और मौजूदा उपचार व्यवस्था के अनुसार उन्हें दिन में करीब चार बार इंसुलिन लगाना पड़ता है।
86 बच्चों के लिए महीने में 10 हजार से ज्यादा निडिल की जरूरत
यदि 86 बच्चों के आंकड़े को आधार माना जाए तो चार बार इंसुलिन लगाने के हिसाब से प्रतिदिन करीब 344 निडिल और महीने में लगभग 10,320 निडिल की जरूरत होगी। स्थानीय स्तर पर करीब एक साल पहले दो लाख निडिल खरीदने का निर्णय लिया गया था, लेकिन अब तक सिर्फ 3,500 निडिल ही खरीदी जा सकी हैं। इतनी संख्या में निडिल सभी बच्चों को वितरित की जाए तो यह स्टॉक करीब 10 दिन में ही खत्म हो सकता है।
हर महीने 600 रुपए तक का अतिरिक्त बोझ
निडिल उपलब्ध नहीं होने से गरीब और जरूरतमंद परिवारों को बाजार से इन्हें खरीदना पड़ रहा है। प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर 10 निडिल की कीमत करीब 50 रुपए बताई गई है। दिन में चार बार इंसुलिन लगाने वाले एक बच्चे को महीने में लगभग 120 निडिल की जरूरत पड़ सकती है। इस हिसाब से एक परिवार को सिर्फ निडिल खरीदने में करीब 600 रुपए प्रतिमाह खर्च करने पड़ सकते हैं।
7 हजार रुपए तक की किट, लेकिन जरूरी निडिल गायब
स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रत्येक बच्चे को हर महीने करीब 7 हजार रुपए तक की इंसुलिन, पेन, ग्लूकोमीटर और अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। सीजीएमएससी के माध्यम से इंसुलिन और पेन की आपूर्ति भी नियमित बताई गई है। पेन खराब होने पर उसे बदलने की सुविधा भी उपलब्ध है। लेकिन जिस निडिल के बिना इंसुलिन-पेन का इस्तेमाल ही नहीं किया जा सकता, उसकी नियमित आपूर्ति व्यवस्था में शामिल नहीं होने से पूरी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। मामला निडिल की कीमत से ज्यादा खरीद और आपूर्ति व्यवस्था में तालमेल की कमी का नजर आ रहा है। विभाग का कहना है कि सीजीएमएससी से नियमित आपूर्ति शुरू होने तक स्थानीय स्तर पर निडिल खरीदकर बच्चों को उपलब्ध कराई जाएगी।
विभाग ने माना- निडिल उपलब्ध कराने पर बनी सहमति
RBSK एवं DEIC की जिला नोडल अधिकारी डॉ. दिव्या श्रीवास्तव के मुताबिक, दुर्ग में विभागीय आंकड़ों के अनुसार टाइप-1 डायबिटीज से पीड़ित 28 बच्चे हैं। इन बच्चों के लिए प्रत्येक बुधवार को DEIC में विशेष शिविर लगाया जाता है। उन्होंने कहा कि बच्चों को अब तक इंसुलिन, पेन और अन्य सहयोगी उपकरण दिए जा रहे थे। निडिल भी उपलब्ध कराने पर सहमति बन गई है।