नक्सलवाद के बाद अब बस्तर की तस्वीर बदलने का संकल्प, अमित शाह बोले– हर निशानी मिटाकर क्षेत्र को बनाएंगे खुशहाल,200 से अधिक सुरक्षा कैंप बनेंगे

नक्सलवाद के बाद अब बस्तर की तस्वीर बदलने का संकल्प, अमित शाह बोले– हर निशानी मिटाकर क्षेत्र को बनाएंगे खुशहाल,200 से अधिक सुरक्षा कैंप बनेंगे

‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’, दंतेवाड़ा में तीन दिवसीय शिविर के जरिए 768 दिव्यांगजनों को मिलेगी सहायता

रायपुर। नक्सलवाद से मुक्ति के बाद बस्तर में पुनर्वास, जनकल्याण और विकास को गति देने की दिशा में केंद्र एवं राज्य सरकार ने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट की हैं। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने के बाद अब उससे प्रभावित लोगों के घावों पर मरहम लगाना, उनका पुनर्वास करना और उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अवसर उपलब्ध कराना सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की हर निशानी मिटाकर बस्तर को फिर से खुशहाल और समृद्ध बनाना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री के रूप में जनसेवा के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में चलाए जा रहे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत दंतेवाड़ा में 15 से 17 अक्टूबर तक तीन दिवसीय निःशुल्क दिव्यांगजन कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर आयोजित किया जा रहा है। अमित शाह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शिविर के दूसरे चरण का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

768 दिव्यांगजनों को मिलेंगे कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण

दंतेवाड़ा में आयोजित शिविर के माध्यम से दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिले के कुल 768 दिव्यांगजनों को लाभान्वित करने का लक्ष्य है। इनमें दंतेवाड़ा के 509, बीजापुर के 197 और सुकमा के 62 हितग्राही शामिल हैं। लाभार्थियों को कृत्रिम अंग, व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, बैसाखी, श्रवण यंत्र और अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, जयपुर और सहयोगी संस्थाओं के सहयोग से आयोजित इस शिविर का उद्देश्य नक्सली हिंसा से प्रभावित लोगों को आत्मनिर्भर बनाना और उनके जीवन में नई उम्मीद जगाना है।

नक्सलवाद की पीड़ा दूर करना हमारी जिम्मेदारी: अमित शाह

अमित शाह ने कहा कि नक्सली हिंसा ने पांच दशकों तक बस्तर के गरीब और आदिवासी परिवारों को गहरी पीड़ा दी। आईईडी विस्फोटों में अनेक निर्दोष नागरिकों ने अपने अंग गंवाए। नक्सलवाद का अंत होने के बाद भी प्रभावित परिवारों की कठिनाइयां समाप्त नहीं हुई हैं। इसलिए उन्हें पुनर्वास, सहायक उपकरण और सम्मानजनक जीवन के अवसर उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि 5 से 7 अक्टूबर के दौरान जगदलपुर में आयोजित शिविर में 3,600 से अधिक दिव्यांगजन लाभान्वित हुए थे। शाह ने कहा कि केंद्र सरकार नक्सली हिंसा से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति के पुनर्वास के लिए प्रतिबद्ध है और इस कार्य में छत्तीसगढ़ सरकार को पूरा सहयोग दिया जाएगा।

200 से अधिक सुरक्षा कैंप बनेंगे ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’

बस्तर में विकास को नई गति देने के लिए 200 से अधिक सुरक्षा शिविरों को ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित करने की योजना है। अमित शाह के अनुसार, जिन स्थानों पर कभी सुरक्षा बलों के जवान लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करते थे, उन्हीं स्थानों से अब जनसेवा और विकास के कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा। इन केंद्रों के माध्यम से स्थानीय लोगों को सरकारी योजनाओं, कौशल विकास और आजीविका संबंधी गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास होगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया कि महान जननायक शहीद वीर गुंडाधुर के गांव नेतानार में पहला सेवा डेरा प्रारंभ किया गया है। यहां सिलाई-कढ़ाई के प्रशिक्षण के साथ इमली की पैकेजिंग और पारंपरिक ढेंकी पद्धति से चावल तैयार करने जैसी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

नक्सलियों के आत्मसमर्पण और पुनर्वास को लेकर आंकड़े

अमित शाह ने बताया कि लगभग 8,526 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें 7,328 लोगों के बैंक खाते खोले गए, 1,620 लोगों को इनामी राशि और 7,882 लोगों को प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई। 455 लोगों को नौकरी तथा 129 लोगों को भूमि आवंटित की गई है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 4,014 आवास उपलब्ध कराए गए, जबकि 2,308 आदिवासियों को कौशल विकास प्रशिक्षण दिया गया। इसके अलावा 6,763 नए राशन कार्ड बनाए गए, 2,808 परिवारों को निःशुल्क बिजली उपलब्ध कराई गई तथा 372 नई सड़क परियोजनाएं प्रारंभ की गई हैं। क्षेत्र में 670 पुलियों का निर्माण भी किया जा रहा है।

बस्तर को देश के अग्रणी जनजातीय क्षेत्रों में शामिल करेंगे: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प से छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद की दशकों पुरानी चुनौती से मुक्ति मिली है। इस सफलता में सुरक्षा बलों के साहस और बलिदान के साथ बस्तर की जनता के सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के कारण बस्तर विकास की दौड़ में पीछे रह गया था। अब सरकार का लक्ष्य इस क्षेत्र को देश के सबसे विकसित जनजातीय क्षेत्रों में अग्रणी बनाना है। इसके लिए सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नियद नेल्लानार योजना के तहत 500 से अधिक गांवों में सड़क और बिजली की सुविधाएं पहुंची हैं। दूरस्थ क्षेत्रों में 431 स्कूल खोले गए हैं और ग्रामीणों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

सिंचाई परियोजनाओं से 80 हजार एकड़ कृषि भूमि को लाभ

मुख्यमंत्री ने बस्तर में कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सिंचाई सुविधाओं के विस्तार पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार में बड़ी सिंचाई परियोजनाओं के लिए लगभग 2,000 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने पर लगभग 80 हजार एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलने की उम्मीद है। पशुपालन और डेयरी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि हो और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर विकसित हों।

दिव्यांगजनों के जीवन में लौटेगा आत्मविश्वास

कार्यक्रम के दौरान कृत्रिम अंग प्राप्त करने वाले लाभार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए। सुकमा जिले के दिव्यांग पुलिस जवान मड़काम मुन्ना ने बताया कि वर्ष 2013 में गश्त के दौरान आईईडी विस्फोट में उनका बायां पैर क्षतिग्रस्त हो गया था। कृत्रिम पैर मिलने के बाद अब वे फिर से चलने लगे हैं। बीजापुर जिले के धर्मारम निवासी चंद्रैया सपका ने बताया कि वर्ष 2012 में आईईडी विस्फोट में उनका दायां पैर चला गया था। कृत्रिम पैर मिलने से उन्हें दोबारा चलने का अवसर मिला। वहीं, दंतेवाड़ा जिले के अजय सोरी और कोसी पोडियाम ने ट्राइसाइकिल मिलने पर खुशी जताई। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सली हिंसा से प्रभावित लोगों को पुनर्वास और सहायता उपलब्ध कराने का अभियान लगातार जारी रहेगा। सरकार का प्रयास है कि कोई भी प्रभावित व्यक्ति जरूरी सहायता से वंचित न रहे।

शांति के बाद समृद्धि की ओर बस्तर

केंद्र और राज्य सरकार ने बस्तर में शांति स्थापित होने के बाद विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि, पर्यटन और जनजातीय संस्कृति को आगे बढ़ाने पर जोर दिया है। सरकार का लक्ष्य दूरस्थ गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना, युवाओं को अवसर उपलब्ध कराना और हिंसा से प्रभावित परिवारों को सम्मानजनक जीवन देना है। अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विश्वास जताया कि समन्वित प्रयासों से बस्तर शांति, समृद्धि और विकास की नई पहचान स्थापित करेगा।

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