भनसुली आर के मां चंडी मंदिर में 39 वर्षों से अखंड आस्था की ज्योति, शारदीय नवरात्रि में प्रज्वलित हुए 186 ज्योति कलश

भनसुली आर के मां चंडी मंदिर में 39 वर्षों से अखंड आस्था की ज्योति, शारदीय नवरात्रि में प्रज्वलित हुए 186 ज्योति कलश

स्वयंभू मानी जाती हैं मां चंडी, स्थापना के इतिहास की स्पष्ट जानकारी नहीं; नवरात्रि में दर्शन-पूजन के लिए उमड़ रहे श्रद्धालु

जामगांव-आर। जामगांव-आर के समीपस्थ ग्राम भनसुली स्थित मां चंडी मंदिर में आस्था और श्रद्धा की अनूठी परंपरा पिछले 39 वर्षों से निरंतर निभाई जा रही है। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर इस वर्ष मंदिर में 186 ज्योति कलश स्थापित किए गए हैं। मां चंडी के प्रति ग्रामीणों की अटूट आस्था और विश्वास के चलते नवरात्रि के दौरान मंदिर में भक्तिमय माहौल बना हुआ है। आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं। नवरात्रि के दौरान मां चंडी के दरबार में श्रद्धालु माथा टेककर परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलकामना के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। मंदिर में स्थापित ज्योति कलश श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था और माता के प्रति समर्पण का प्रतीक बने हुए हैं। बीते 39 वर्षों से लगातार ज्योति कलश स्थापना की परंपरा का निर्वहन किया जाना इस मंदिर की विशेष पहचान है।

स्वयंभू हैं मां चंडी, स्थापना के इतिहास की स्पष्ट जानकारी नहीं

ग्राम के बुजुर्गों के अनुसार, मां चंडी स्वयंभू हैं। मंदिर में माता की स्थापना कब और किस कालखंड में हुई, इस संबंध में कोई स्पष्ट ऐतिहासिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। हालांकि, पीढ़ियों से ग्रामीण माता की पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। समय के साथ मां चंडी मंदिर क्षेत्र के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया है।

39 वर्षों से परंपरा का निरंतर निर्वहन

मां चंडी मंदिर में नवरात्रि के अवसर पर ज्योति कलश स्थापना की परंपरा पिछले 39 वर्षों से निरंतर जारी है। इस वर्ष स्थापित 186 ज्योति कलश श्रद्धालुओं की धार्मिक भावना और माता के प्रति अटूट विश्वास को दर्शाते हैं। नवरात्रि के दौरान मंदिर में पहुंच रहे भक्तों की श्रद्धा और पूजा-अर्चना से पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। ग्राम भनसुली का यह मंदिर धार्मिक परंपरा, जनआस्था और सामूहिक सहभागिता का प्रतीक बना हुआ है।

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