दुर्ग (धमधा)। दुर्ग जिले के प्राचीन स्थल धमधागढ़ (धमधा) में स्थित गोंड राजाओं के समय का प्रसिद्ध किला और आसपास के ऐतिहासिक तत्त्व प्रशासन की अनदेखी के कारण जर्जर होते जा रहे हैं। स्थानीय इतिहास और पुरातात्विक जानकारियों के अनुसार यह किला छत्तीसगढ़ की प्राचीन रियासतों में सबका- ध्यान खींचने वाला एक संवेदनशील धरोहर स्थल रहा है और प्राचीन जल-प्रणाली (लगभग 126 तालाबों की व्यवस्था) से जुड़ा हुआ है — यही वजह है कि यह स्थान केवल पुरातात्विक स्रोत ही नहीं, बल्कि समग्र आदिवासी परंपरा और स्थानीय संस्कृति का भी प्रतीक है।
स्थल का सांस्कृतिक आयाम: धमधा-किला और बुढ़ा देव — बूढ़ी माई मंदिर
धमधा (प्राचीन नाम: धमधागढ़/धर्मदधम) में स्थित किले के निकट ही 1907 में स्थापित बुढ़ा देव और बूढ़ी माई का मंदिर है, जो क्षेत्रीय आस्था का केन्द्र रहा है। स्थानीय लोग व आदिवासी समुदाय इस मंदिर और किले को सामाजिक-धार्मिक गतिविधियों तथा स्थानीय स्मृतियों के केन्द्र के रूप में देखते हैं; साथ ही यह स्थल पर्यटन के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।
किले की वर्तमान दशा — स्थल निरीक्षण व स्थानीय फूटेज के संकेत
हालिया वीडियोज़ और क्षेत्रीय रिपोर्टिंग से पता चलता है कि किले की दीवारें और अधिकांश पत्थर-निर्मित हिस्से टूट-फूट की स्थिति में हैं; इमारती ढांचा और प्राचीन संरचनाएं खुले आसमान के संपर्क में रहने के कारण और अधिक क्षतिग्रस्त हो रही हैं। स्थानीय व्लॉग और स्थल के विडियो फुटेज भी इसी बात की पुष्टि करते हैं कि किले का संरक्षण व नियमित मरम्मत अनुपस्थित है, जिसका असर मंदिर और आसपास की पुरानी जलनिकासी प्रणालियों पर भी पड़ रहा है।
संरक्षण की कमी के संभावित परिणाम
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तुरंत संरक्षणात्मक कदम न उठाए जाएँ तो: ऐतिहासिक स्थापत्य की बहुमूल्य जानकारी स्थायी रूप से बिगड़ सकती है,स्मारक से जुड़ी लोक-कथाएँ, सांस्कृतिक परम्पराएँ और स्थानीय चित्रण भौतिक रूप से कट सकते हैं एवं पुराने तालाबों व जल प्रणाली की उपेक्षा से स्थानीय पानी-व्यवस्था और जैवविविधता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। (इन बिंदुओं को इस क्षेत्र के ऐतिहासिक वर्णन और जल-परिवर्तन पर आधारित स्थानीय रिपोर्टें बल देती हैं)।
स्थानीय आवाज़ और अपेक्षा
स्थानीय ग्रामीण व समाजसेवी तर्रा निवासी राज ठाकुर बताते हैं कि वर्षों से रिपोर्टिंग की जाती रही है पर प्रशासनिक पहल सीमित रही — वे शासन से शीघ्र संरक्षण, मरम्मत व साइट के संरचनात्मक सर्वे के आदेश की माँग कर रहे हैं ताकि किला और मंदिर दोनों को संवेदनशील ढंग से सुरक्षित किया जा सके।
सरकार से माँग — क्या होना चाहिए
- तत्काल सर्वे: राज्य पुरातत्त्व विभाग/सहयोगी संस्थाओं द्वारा साइट-इनस्पेक्शन और संरचनात्मक सर्वे कराया जाए।
- आकस्मिक सुरक्षा: अस्थायी बाड़ा, गिरते हिस्सों की तात्कालिक मरम्मत व ध्वस्त हिस्सों को सुरक्षित करना।
- दीर्घकालीन संरक्षण योजना: फोर्ट और मंदिर के लिये संरक्षित स्मारक घोषित कर,स्थानीय समुदाय को शामिल कर संरक्षण व पर्यटन संवर्धन योजना बनाई जाए।
- जलप्रणाली का पुनरुद्धार: किले के चारों ओर मौजूद तालाबों और बूढ़ा नाला जैसी पारंपरिक नहरों की मरम्मत करके पारिस्थितिक व जल संरक्षण को जोड़ा जाए।
- स्थानीय रोजगार व संवेदनशील पर्यटन: पुनरुद्धार परियोजना में स्थानीय आदिवासी समुदाय को प्रशिक्षित कर पर्यटन तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से आय सृजन सुनिश्चित किया जाए।