
रायपुर। छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक-पर्यटन स्थलों में शामिल चंपारण में राम वनगमन पर्यटन परिपथ के तहत विकसित सुविधाएं निर्माण के तीन साल बाद भी पर्यटकों के इंतजार में हैं। रायपुर से करीब 45 किलोमीटर दूर चंपेश्वर महादेव मंदिर के पीछे स्थापित भगवान राम की 25 फीट ऊंची प्रतिमा के साथ कैफेटेरिया, राम वाटिका, दीप स्तंभ, पर्यटन सूचना केंद्र और शौचालय जैसी सुविधाएं विकसित की गई थीं। इन कार्यों पर करीब 4.50 करोड़ रुपए खर्च किए गए, लेकिन अधिकांश सुविधाएं अब तक शुरू नहीं हो सकी हैं। 29 अगस्त 2023 को बलुआ पत्थर से बनी भगवान राम की प्रतिमा और परिसर में तैयार अन्य सुविधाओं का उद्घाटन किया गया था। उस समय परिसर को रोशनी से जगमग रखने और पर्यटकों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही गई थी। करीब तीन साल बाद भी कैफेटेरिया और पर्यटन सूचना केंद्र बंद हैं। शौचालयों पर भी ताले लगे हैं, जबकि मंदिर परिसर का प्रवेश द्वार भी अब तक बंद बताया जा रहा है।
शाम होते ही प्रतिमा भी अंधेरे में
परिसर की मौजूदा स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शाम करीब 7 बजे यहां अंधेरा छा जाता है। प्रतिमा के आसपास रोशनी के लिए लाइटें तो लगाई गई हैं, लेकिन वे जलती नहीं हैं। कैफेटेरिया और शौचालय बंद होने के कारण यहां आने वाले लोगों को बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हो पातीं। परिसर में जगह-जगह पेड़ गिरे हुए और गंदगी दिखाई देने की बात सामने आई है। स्थानीय निवासी सुरेश द्विवेदी के मुताबिक, परिसर बनने के बाद से यहां पर्यटकों की आवाजाही बेहद कम है। उनका कहना है कि दिन के समय भी कुछ असामाजिक तत्व यहां दिखाई देते हैं, जिन्हें स्थानीय लोगों को वहां से हटाना पड़ता है।
उद्घाटन के बाद भी शुरू नहीं हुआ पर्यटन केंद्र
राम वनगमन पर्यटन परिपथ के तहत चंपारण में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई सुविधाएं विकसित की गई थीं। इनमें पर्यटकों के बैठने और ठहरने की व्यवस्था के साथ खान-पान, सूचना और स्वच्छता से जुड़ी सुविधाएं शामिल थीं। लेकिन निर्माण पूरा होने और उद्घाटन के बावजूद इनका नियमित संचालन शुरू नहीं हो पाया। इससे करोड़ों रुपए खर्च कर तैयार किया गया परिसर अपने उद्देश्य के अनुरूप पर्यटकों को आकर्षित नहीं कर पा रहा है।
पौराणिक मान्यता से जुड़ा है चंपारण
चंपेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यता के अनुसार वनवास के दौरान भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण अयोध्या से दक्षिण भारत की ओर जाते समय दंडकारण्य क्षेत्र से होकर गुजरे थे। मान्यता है कि उन्होंने चंपारण के प्राचीन वन क्षेत्र में विश्राम किया था और यहां चंपेश्वर महादेव शिवलिंग की स्थापना कर पूजा की थी। इसी वजह से यह स्थान धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। हरि यानी भगवान विष्णु और हर यानी भगवान शिव के मिलन से जुड़ी मान्यता के कारण चंपारण को धार्मिक पर्यटन के लिहाज से भी विशेष महत्व दिया जाता है।
मंत्री बोले- जल्द शुरू होंगी सुविधाएं
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि राम वनगमन पर्यटन परिपथ के तहत विकसित स्थलों पर जिन सुविधाओं का संचालन शुरू नहीं हुआ है, उन्हें जल्द शुरू कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि अधूरे कार्यों को भी पूरा कराया जाएगा। अब देखना यह है कि करीब 4.50 करोड़ रुपए खर्च कर विकसित किए गए चंपारण परिसर में पर्यटकों के लिए बंद पड़ी सुविधाएं कब शुरू होती हैं और शाम के बाद अंधेरे में डूबने वाला यह पर्यटन स्थल कब फिर से रोशन होता है।