
रायपुर। छत्तीसगढ़ की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना में पहली बार बड़े स्तर पर कराई जा रही ई-केवाईसी के बाद हजारों हितग्राहियों की राशि रोक दी गई है। ई-केवाईसी नहीं होने के कारण करीब 67 हजार महिलाओं को जुलाई माह से योजना की 1000 रुपए मासिक राशि नहीं मिल पाई है। इनमें लगभग 50 हजार महिलाएं अपने दर्ज पते पर नहीं मिलीं, जबकि करीब 17 हजार महिलाओं के फिंगर प्रिंट और रेटिना आधार के बायोमेट्रिक डेटा से मैच नहीं कर रहे हैं। सरकार ने अब ई-केवाईसी की अवधि बढ़ाकर 30 सितंबर तक कर दी है। महिला एवं बाल विकास विभाग के अनुसार, जिन महिलाओं का बायोमेट्रिक मैच नहीं हो रहा है, उनके भुगतान को लेकर शासन स्तर पर समाधान पर विचार किया जा रहा है।
पहली बार सभी हितग्राहियों की हो रही ई-केवाईसी
महतारी वंदन योजना की शुरुआत 1 मार्च 2024 को हुई थी। उस समय करीब 70 लाख महिलाओं के खातों में हर महीने 1000 रुपए की सहायता राशि भेजी जाने लगी थी। योजना शुरू होने के लगभग दो साल बाद पहली बार सभी हितग्राहियों की व्यापक ई-केवाईसी कराई जा रही है। ई-केवाईसी और डेटा सत्यापन के बाद अब तक करीब 1.61 लाख महिलाओं के नाम लाभार्थी सूची से हटाए गए हैं। इनमें लगभग 1.33 लाख महिलाओं की मृत्यु हो चुकी है, जबकि 27,700 हितग्राही अपात्र पाए गए। वहीं 912 महिलाओं ने स्वेच्छा से योजना का लाभ छोड़ दिया है।
पते पर पहुंची टीम, 50 हजार महिलाएं नहीं मिलीं
ई-केवाईसी नहीं कराने वाली महिलाओं की तलाश के लिए विभागीय टीमें उनके दर्ज पते पर पहुंचीं। करीब 50 हजार महिलाएं वहां नहीं मिलीं। पड़ोसियों से पूछताछ में जानकारी मिली कि इनमें से कई महिलाएं कुछ महीने पहले दूसरे जिले या प्रदेश में स्थानांतरित हो चुकी हैं। विभाग के अनुसार, जिन स्थानों से महिलाओं ने योजना के लिए आवेदन किया था, वे उसी क्षेत्र में पहुंचकर ई-केवाईसी पूरी करा सकती हैं। सत्यापन पूरा होने के बाद उनकी रुकी हुई राशि जारी करने की प्रक्रिया की जाएगी।
17 हजार का बायोमेट्रिक मैच नहीं
करीब 17 हजार महिलाओं के फिंगर प्रिंट और रेटिना का डेटा आधार से मैच नहीं हो रहा है। इस कारण उनकी ई-केवाईसी पूरी नहीं हो पाई है और जुलाई से उनकी राशि रोक दी गई है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने इन हितग्राहियों के भुगतान के संबंध में शासन को पत्र भेजा है। सरकार स्तर पर इस बात पर विचार किया जा रहा है कि बायोमेट्रिक सत्यापन में तकनीकी समस्या वाले हितग्राहियों को किस प्रक्रिया के तहत योजना की राशि उपलब्ध कराई जाए।
98 प्रतिशत ई-केवाईसी पूरी
महिला एवं बाल विकास विभाग ने 3 अप्रैल 2026 से कॉमन सर्विस सेंटरों के माध्यम से ई-केवाईसी शुरू कराई थी। पहले इसकी अंतिम तिथि 31 अगस्त तय की गई थी, जिसे अब एक महीने के लिए बढ़ा दिया गया है। प्रदेश में कुल 68.6 लाख महिलाओं की ई-केवाईसी होनी थी। इनमें से 67.4 लाख की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जो करीब 98 प्रतिशत है। लगभग 1.17 लाख हितग्राहियों की ई-केवाईसी अभी बाकी है। विभागीय स्तर पर इनमें से करीब 10 हजार महिलाओं के मृत होने की जानकारी भी सामने आई है।
27,700 हितग्राही मिले अपात्र
विभाग ने लाभार्थियों के डेटा का मिलान खाद्य विभाग के राशन कार्ड ई-केवाईसी डेटा से भी कराया। जांच के दौरान 27,700 हितग्राही अपात्र पाए गए। इनमें करीब 15 हजार ऐसे मामले मिले, जिनमें दो-दो आवेदन किए गए थे। ऐसे मामलों में एक-एक आवेदन निरस्त कर दिया गया। वहीं करीब 12,700 हितग्राही सरकारी नौकरी या आयकरदाता होने के कारण अपात्र पाए गए। विभाग के अनुसार, अपात्र हितग्राहियों से अब तक करोड़ों रुपए की राशि समायोजित और वसूल की जा चुकी है।
35 मामलों में जिंदा महिला को मृत दर्ज करने की गड़बड़ी
ई-केवाईसी के दौरान विभाग को 35 ऐसे मामले भी मिले, जिनमें नाम और पति का नाम एक जैसा होने के कारण रिकॉर्ड में गड़बड़ी हो गई। कुछ मामलों में जीवित महिला को मृत मान लिया गया, जबकि मृत महिला के खाते में योजना की राशि भेजी जाती रही। अब ऐसे मामलों का अलग-अलग सत्यापन कर मृत महिला के खाते में भेजी गई राशि की वसूली और पात्र जीवित हितग्राही को भुगतान की प्रक्रिया की जा रही है।
मंत्री बोलीं- बायोमेट्रिक मैच नहीं होने वाली माताएं चिंता न करें
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि ई-केवाईसी की अंतिम तिथि बढ़ा दी गई है और बायोमेट्रिक मैच नहीं होने वाली महिलाओं के भुगतान को लेकर शासन स्तर पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन महिलाओं ने दो साल पहले जिस क्षेत्र से आवेदन किया था, वे वहां पहुंचकर ई-केवाईसी करवा लें। सत्यापन पूरा होने के बाद उनकी रुकी हुई राशि जारी करने की कार्रवाई की जाएगी।