रायपुर (YC न्यूज डेस्क) ! भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई के बाद अब क्षतिपूर्ति पौधारोपण जमीन के अभाव में अटक गया है। वन विभाग इस मानसून में पौधारोपण का लक्ष्य पूरा करने के लिए नई जमीन की तलाश में जुटा है। कांकेर और कोंडागांव में उपयुक्त भूमि नहीं मिलने के बाद अब धमतरी जिले में करीब 400 हेक्टेयर जमीन खोजी जा रही है, जहां लगभग 4 लाख पौधे लगाए जाने की योजना है। जानकारी के अनुसार, रायपुर-विशाखापट्टनम मार्ग के तहत धमतरी, कांकेर और कोंडागांव के जंगलों में 86 हजार से अधिक पेड़ काटे गए थे। नियमों के मुताबिक 228 हेक्टेयर वन भूमि के बदले दोगुने क्षेत्र यानी 456 हेक्टेयर में पौधारोपण किया जाना अनिवार्य है। इसके लिए 4 से साढ़े 4 लाख पौधे लगाने का प्रस्ताव है, लेकिन अब तक जमीन तय नहीं हो सकी है। वन विभाग की पूर्व योजना भी जमीन विवाद के कारण अटक चुकी है। वर्ष 2022 में महासमुंद वन क्षेत्र में 200 हेक्टेयर जमीन चिन्हित कर करीब 2 लाख पौधे लगाने की तैयारी थी, लेकिन देरी के चलते वहां अवैध कब्जे हो गए। नियमों के तहत विवादित भूमि पर पौधारोपण संभव नहीं होने से यह योजना भी ठप पड़ गई।
यह सड़क परियोजना कुल 464 किलोमीटर लंबी सिक्स लेन मार्ग के रूप में विकसित की जा रही है, जिसमें से 124 किलोमीटर हिस्सा छत्तीसगढ़ के घने जंगलों से गुजरता है। सड़क निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई की गई है। पेड़ों की कटाई के एवज में केंद्र सरकार से करीब 95 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं, जिन्हें कैंपा फंड में जमा किया गया है। इनमें से लगभग 80 करोड़ रुपए वर्ष 2022 में और शेष 13 करोड़ रुपए पिछले वर्ष जारी किए गए। अब वन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती समय रहते जमीन उपलब्ध कराकर मानसून सत्र में पौधारोपण कार्य पूरा करना है, ताकि पर्यावरणीय क्षति की भरपाई की जा सके।