रायपुर/भिलाई। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले मामले में एक और बड़ी कार्रवाई सामने आई है। ACB और EOW की संयुक्त टीम ने शराब कारोबारी विजय भाटिया को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद उसे रायपुर लाया जा रहा है, वहीं भाटिया के दुर्ग-भिलाई स्थित 6 से अधिक ठिकानों पर छापेमारी जारी है।
भिलाई के नेहरू नगर स्थित घर पर शनिवार सुबह 6 बजे ACB-EOW की टीम पहुंची। दो गाड़ियों में सात अधिकारियों की टीम ने पहुंचते ही पूरे घर को चारों तरफ से घेर लिया और भीतर रह रहे लोगों से पूछताछ शुरू की। महिला पुलिस की मौजूदगी में नौकरों से भी पूछताछ की जा रही है, हालांकि उन्हें घर के सामान्य कार्यों की अनुमति दी गई है।
गौरतलब है कि विजय भाटिया पिछले दो साल से फरार चल रहा था। इससे पहले ईडी ने उनके ठिकानों पर छापा मारा था, लेकिन वह बच निकले थे। अब ACB की गिरफ्त में आने के बाद उनसे पूछताछ के जरिये पूरे शराब घोटाले की परतें खुलने की उम्मीद जताई जा रही है।
पिछली कार्रवाई और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
साल 2022 में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के जन्मदिन पर ईडी ने उनके राजनीतिक सलाहकार विनोद वर्मा, OSD आशीष वर्मा, और विजय भाटिया समेत कई करीबियों के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी। इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक पारा चढ़ गया था। बघेल ने इस छापेमारी को “प्रधानमंत्री मोदी का जन्मदिन गिफ्ट” बताया था।
12 दिन पहले 39 जगहों पर रेड
महज 12 दिन पहले ACB और EOW ने राज्यभर में 39 स्थानों पर छापेमारी की थी, जिसमें 90 लाख रुपए नगद, सोना-चांदी, और महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए थे। दुर्ग, भिलाई, धमतरी और महासमुंद में हुई इस कार्रवाई में कई बड़े नाम सामने आए थे।
शराब घोटाला क्या है?
ईडी (ED) की ओर से दर्ज FIR के अनुसार, छत्तीसगढ़ में 2019 से 2022 के बीच एक संगठित सिंडिकेट ने मिलकर सरकारी शराब दुकानों से डुप्लीकेट होलोग्राम लगाकर अवैध शराब की बिक्री की। इसमें शामिल प्रमुख नाम IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी, और कारोबारी अनवर ढेबर बताए गए हैं। इस घोटाले से राज्य सरकार को 2000 करोड़ से ज्यादा के राजस्व का नुकसान हुआ।