YC न्यूज डेस्क ! उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम के कपाट 149 दिनों के अंतराल के बाद गुरुवार सुबह विधिवत पूजा-अर्चना के साथ खोल दिए गए। सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर मंदिर के द्वार खुलते ही भगवान बद्रीविशाल के दर्शन शुरू हो गए। कपाट खुलने के इस पावन अवसर पर सबसे पहले मंदिर में रावल ने प्रवेश किया, वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद रहे। कड़ाके की ठंड और लगभग -4 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच पहले ही दिन करीब 7 हजार श्रद्धालुओं के दर्शन करने का अनुमान है। कपाट खुलते ही मंदिर परिसर “जय बद्रीविशाल” के जयकारों से गूंज उठा और श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। कपाट खुलने के साथ ही मंदिर के भीतर पूजा-अर्चना शुरू हो गई है। श्रद्धालु सबसे पहले पिछले छह महीनों से प्रज्ज्वलित अखंड ज्योति के दर्शन कर रहे हैं। इस दौरान भगवान बद्रीविशाल पर कपाट बंद होने के समय चढ़ाया गया घृत कंबल हटाया गया, जो इस बार घी से लबालब और सुरक्षित अवस्था में मिला है। पूर्व धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल के अनुसार घृत कंबल का इस तरह सुरक्षित और घी से भरा मिलना पूरे वर्ष अनुकूल मौसम, अच्छी फसल और समृद्धि का संकेत माना जाता है।
क्या है घृत कंबल की परंपरा
घृत कंबल बद्रीनाथ धाम की एक प्राचीन परंपरा है, जिसे माणा गांव की कुंवारी लड़कियां उपवास रखकर एक ही दिन में तैयार करती हैं। ऊन से बने इस कंबल को बद्री गाय के शुद्ध घी में डुबोया जाता है और कपाट बंद होने से पहले भगवान की प्रतिमा को इससे ढक दिया जाता है। छह महीने तक बर्फबारी और अत्यधिक ठंड के बावजूद यह कंबल सुरक्षित रहता है, जिसकी स्थिति को शुभ-अशुभ संकेत के रूप में देखा जाता है।
चारधाम यात्रा पूर्ण रूप से शुरू
बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही उत्तराखंड की प्रसिद्ध चारधाम यात्रा अब पूरी तरह शुरू हो गई है। इससे पहले गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के अवसर पर खोले गए थे, जबकि केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को खोले गए थे। राज्य सरकार का दावा है कि इस वर्ष चारधाम यात्रा को पहले से अधिक सुगम और सुरक्षित बनाया गया है। वर्ष 2025 में करीब 51 लाख श्रद्धालुओं ने चारधाम के दर्शन किए थे, जबकि इस बार अब तक 21 लाख से अधिक श्रद्धालु पंजीकरण करा चुके हैं। मुख्यमंत्री धामी ने इस अवसर पर कहा कि चारों धामों के आशीर्वाद से यात्रा सुरक्षित और व्यवस्थित रूप से संपन्न हो तथा श्रद्धालु नियमों का पालन करते हुए दर्शन करें।