
कोलकाता/नई दिल्ली। कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम के दौरान वंदेमातरम् को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक गलियारों से निकलकर बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के परिवार तक पहुंच गया है। बंगाल के नैहाटी से भाजपा विधायक और बंकिमचंद्र के भाई पूर्णचंद्र चट्टोपाध्याय की पांचवीं पीढ़ी के वंशज सुमित्रो चटर्जी ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में वंदेमातरम् का गायन चल रहा था, इसी दौरान सोनिया गांधी ने इसे रोकने का इशारा किया। घटना का वीडियो सामने आने के बाद विवाद बढ़ गया है। हालांकि, इस आरोप और वीडियो की व्याख्या को लेकर कांग्रेस की ओर से अलग पक्ष सामने आ सकता है।
चटर्जी ने सोनिया गांधी को लिखा पत्र
सुमित्रो चटर्जी ने सोनिया गांधी के नाम पत्र लिखकर घटना पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने खुद को आम नागरिक, देशभक्त और बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय का सीधा वंशज बताते हुए कहा कि वंदेमातरम् से जुड़ी घटना ने उन्हें गहरा आघात पहुंचाया है। चटर्जी का दावा है कि सोनिया गांधी ने वंदेमातरम् का पूरा संस्करण गाए जाने पर असहजता जताई और इसे रोकने की कई बार कोशिश की। उन्होंने इसे स्वतंत्रता आंदोलन के शहीदों और देश के राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ी भावना का अपमान बताया।
‘कांग्रेस ने ऐतिहासिक गलती दोहराई’
भाजपा विधायक ने अपने पत्र में कहा कि 15 अगस्त की घटना केवल दुर्भाग्यपूर्ण नहीं है, बल्कि यह एक ऐतिहासिक गलती को दोहराने जैसा है। उन्होंने श्री अरविंद के उस विचार का भी उल्लेख किया, जिसमें वंदेमातरम् को देशभक्ति की भावना जगाने वाला मंत्र बताया गया था। चटर्जी ने कहा कि आजाद भारत की धरती पर वंदेमातरम् के पूरे गायन को लेकर किसी तरह की अनिच्छा उन लोगों के बलिदान को नजरअंदाज करने के समान है, जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान इस गीत को संघर्ष और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक के रूप में अपनाया था।
स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा रहा है वंदेमातरम्
चटर्जी ने अपने पत्र में वंदेमातरम् के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय चेतना का महत्वपूर्ण प्रतीक बना था। उन्होंने 1896 के भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा वंदेमातरम् गाए जाने का उल्लेख किया। इसके अलावा 1905 के बनारस कांग्रेस अधिवेशन में सरला देवी चौधरानी द्वारा इसके पाठ और स्वतंत्रता आंदोलन के विभिन्न चरणों में इसके इस्तेमाल का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 1909 में बाल गंगाधर तिलक के समर्थकों ने उनके राजद्रोह मुकदमे की सुनवाई के दौरान भी वंदेमातरम् का उद्घोष किया था। 1938 में हैदराबाद की उस्मानिया यूनिवर्सिटी में भी राष्ट्रवादी छात्रों ने प्रतिबंधों के बावजूद इसे आंदोलन के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया था।
भाजपा ने कई शहरों में किया विरोध
वंदेमातरम् विवाद को लेकर भाजपा ने देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किया। पटना में भाजपा युवा मोर्चा ने कैंडल मार्च निकाला, जबकि रायपुर में कार्यकर्ताओं ने पोस्टर लेकर रैली निकाली। कोलकाता में भाजपा कार्यकर्ताओं ने मशाल रैली निकालकर विरोध जताया। अहमदाबाद में भी प्रदर्शन के दौरान सोनिया गांधी के खिलाफ नारेबाजी की गई और पोस्टर के जरिए विरोध दर्ज कराया गया। भाजपा नेताओं का कहना है कि वंदेमातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रवादी आंदोलन की ऐतिहासिक स्मृति से जुड़ा हुआ है। इसी वजह से पार्टी इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस से स्पष्टीकरण और माफी की मांग कर रही है। वहीं, विवाद के बीच कांग्रेस की ओर से इस आरोप पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है, इस पर राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं।