रायपुर। कोल ब्लॉक आबंटन और स्वीकृति को लेकर छत्तीसगढ़ की सियासत में एक बार फिर उबाल आ गया है। प्रदेश के वन मंत्री केदार कश्यप ने रविवार को भाजपा कार्यालय एकात्म परिसर में प्रेस कांफ्रेंस लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि कांग्रेस शासनकाल में नियमों को ताक पर रखकर कोलफील्ड की स्वीकृति दी गई, और आज वही कांग्रेस विपक्ष में रहकर आर्थिक नाकेबंदी की आड़ में राज्य की जनता को गुमराह करने का प्रयास कर रही है। भाजपा नेता ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि वह तारीखों और दस्तावेजों के साथ कांग्रेस की भूमिका को बेनकाब करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने बताया कि 31 मार्च 2021 को गारे-पेलमा सेक्टर-2 के ओपन कास्ट प्रोजेक्ट का समझौता सार्वजनिक रूप से किया गया था। इसके बाद 19 अप्रैल 2022 को भूपेश बघेल के मुख्यमंत्री रहते हुए स्टेज-1 वन स्वीकृति की सिफारिश की गई। और 23 जनवरी 2023 को स्टेज-2 स्वीकृति की प्रक्रिया भी कांग्रेस सरकार द्वारा पूरी की गई।
उन्होंने कहा कि कोल ब्लॉक आबंटन में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की संलिप्तता से जुड़े समाचार पूरे देश के अखबारों में छपे हैं, जिसे अब छिपाया नहीं जा सकता। भाजपा नेता ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह अपने लोगों को बचाने के लिए प्रदेश और देश को संकट में डालने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस सत्ता में होती है, तो नियम विरुद्ध तरीके से स्वीकृतियां देती है, और जब विपक्ष में आती है, तो अराजकता फैलाने की कोशिश करती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की ओर से की जा रही आर्थिक नाकेबंदी न सिर्फ राज्य की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करेगी, बल्कि व्यापार, रोजगार और आम जनजीवन पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को चुनौती देते हुए भाजपा नेता ने कहा कि क्या वे स्वीकार करेंगे कि कांग्रेस सरकार ने कोल ब्लॉक आबंटन और स्वीकृति में अहम भूमिका निभाई थी? क्या वे माफी मांगेंगे? क्या वे यह घोषणा करेंगे कि अब बिजली और एसी का उपयोग नहीं करेंगे?”
भाजपा नेता ने यह भी खुलासा किया कि राजस्थान के मंत्री वीडी कल्ला और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भूपेश बघेल को इस संबंध में कई पत्र लिखे थे। उन्होंने कहा कि 10 जनपथ के दबाव में भूपेश बघेल ने कांग्रेस की राजनीति चमकाने के लिए ऐसे निर्णय लिए, जिनका खामियाजा छत्तीसगढ़ को भुगतना पड़ा। श्री कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता ने पांच वर्षों में कांग्रेस की नीयत को समझ लिया और अब जनहितकारी, सरल व सहज नेता विष्णुदेव साय के हाथों में राज्य की कमान सौंप दी है।”