रायपुर। छत्तीसगढ़ में जनगणना ड्यूटी को लेकर एक अहम कानूनी निर्णय सामने आया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि पंचायत और नगर निकायों में कार्यरत कर्मचारियों को जनगणना कार्य में लगाना पूरी तरह वैध है और इससे बचने का कोई विकल्प नहीं है। कोर्ट ने इसे राष्ट्रीय महत्व का कार्य बताते हुए हर संबंधित कर्मचारी के लिए अनिवार्य बताया है।यह मामला बेमेतरा जिले के नवागढ़ जनपद पंचायत में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 मनीष जैन से जुड़ा है, जिन्होंने कलेक्टर द्वारा जारी आदेश को चुनौती दी थी। आदेश के तहत उन्हें जनगणना शाखा में अटैच किया गया था। याचिकाकर्ता ने इसे दुर्भावनापूर्ण बताते हुए रद्द करने की मांग की थी।सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि यह कोई सामान्य ट्रांसफर नहीं, बल्कि जनगणना अधिनियम 1948 के तहत दी गई विशेष जिम्मेदारी है। आगामी जनगणना को सफल बनाने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की आवश्यकता के चलते यह निर्णय लिया गया।कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि जनगणना एक राष्ट्रीय कर्तव्य है और प्रशासन को यह अधिकार है कि वह आवश्यकता अनुसार किसी भी कर्मचारी की ड्यूटी इसमें लगा सकता है। साथ ही, इस कार्य में नियुक्त कर्मचारियों को “लोक सेवक” का दर्जा मिलेगा और उन्हें अपने दायित्वों का निर्वहन करना होगा।इस फैसले के बाद स्पष्ट हो गया है कि अब जनगणना ड्यूटी से बचना आसान नहीं होगा और सभी संबंधित कर्मचारियों को इसमें सक्रिय भूमिका निभानी होगी।