रायपुर। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन ने शुक्रवार को 11 सूत्री मांगों को लेकर राज्यभर में गुस्से का ज्वालामुखी फोड़ दिया। रायपुर से लेकर बस्तर और सरगुजा तक शासकीय दफ्तर सूने रहे, स्कूलों पर ताले लटक गए और इंद्रावती भवन सहित तमाम विभागों का कामकाज ठप हो गया। नगरीय निकाय, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग समेत अधिकांश कर्मचारियों ने अवकाश लेकर आंदोलन में भाग लिया। विश्वविद्यालय प्राध्यापकों ने भी आंदोलन को समर्थन दिया।
हर जिले में उग्र प्रदर्शन – ‘अब नई साहिबों, मोदी के गारंटी लेकर रहीबो!’
प्रदेशभर में कर्मचारियों ने एक ही सुर में सरकार को चेतावनी दी – अगर संवाद नहीं हुआ तो अनिश्चितकालीन हड़ताल होगी। रायपुर में कमल वर्मा और चंद्रशेखर तिवारी के नेतृत्व में हजारों कर्मचारी सड़क पर उतरे। नवा रायपुर, महासमुंद, धमतरी, गरियाबंद, बलौदाबाजार, दुर्ग, राजनांदगांव, बिलासपुर, कोरबा, जांजगीर, रायगढ़, बस्तर, कांकेर, दंतेवाड़ा, सुकमा, अंबिकापुर और जशपुर में फेडरेशन के बैनर तले विशाल प्रदर्शन हुए।
11 सूत्री मांगों पर आर-पार की लड़ाई
कर्मचारियों की मुख्य मांगें –
केंद्र के समान महंगाई भत्ता लागू हो एवं बकाया एरियर्स जमा हो।
चार स्तरीय वेतनमान और पिंगुआ कमेटी रिपोर्ट सार्वजनिक हो।
सेवा गणना नियुक्ति तिथि से हो और पंचायत सचिवों का शासकीयकरण हो।
शिक्षकों व पशु चिकित्सा अधिकारियों को तीसरा समयमान मिले।
अनुकंपा नियुक्ति में 10% सीलिंग समाप्त हो।
प्रदेश में कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा लागू हो।
अर्जित अवकाश नगदीकरण 300 दिन तक हो।
दैनिक, अनियमित और संविदा कर्मियों का नियमितीकरण हो।
सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष की जाए।
प्रदेशभर में दिखा आंदोलन का असर
बिलासपुर संभाग प्रभारी जी.आर. चंद्रा और रोहित तिवारी के मार्गदर्शन में जिलेभर के कर्मचारियों ने कलमबंद आंदोलन किया। जांजगीर, कोरबा, मुंगेली, गौरेला-मरवाही, रायगढ़ और सारंगढ़ में जिला संयोजकों के नेतृत्व में रैली निकाली गई। बस्तर संभाग प्रभारी कैलाश चौहान और टार्जन गुप्ता के मार्गदर्शन में जगदलपुर, कांकेर, दंतेवाड़ा, सुकमा और नारायणपुर में उग्र प्रदर्शन हुए। सरगुजा संभाग प्रभारी ओंकार सिंह और नृपेंद्र सिंह के नेतृत्व में अंबिकापुर, सूरजपुर, कोरिया, बलरामपुर, जशपुर और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भर्रीडीह में कर्मचारी सड़कों पर उतरे।