छत्तीसगढ़ में मानसून विदाई की उलटी गिनती शुरू — उत्तर-पूर्वी हवाएं करेंगी दस्तक, धीरे-धीरे बढ़ेगी ठंडक

छत्तीसगढ़ में मानसून विदाई की उलटी गिनती शुरू — उत्तर-पूर्वी हवाएं करेंगी दस्तक, धीरे-धीरे बढ़ेगी ठंडक

रायपुर। छत्तीसगढ़ में मानसून के विदा होने की उलटी गिनती शुरू हो गई है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो से तीन दिनों में रायपुर सहित उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ से मानसून की वापसी शुरू हो जाएगी। लगभग चार महीने सक्रिय रहने के बाद इस बार मानसून ने राज्य में सामान्य से 6% अधिक वर्षा दी है। अब हवा के रुख में बदलाव और ठंडी उत्तर-पूर्वी बयार के आगमन से मौसम में ठंडक घुलने लगी है।

●रायपुर-बिलासपुर में शुष्क मौसम के आसार-

मौसम विभाग के अनुसार, रायपुर, बिलासपुर और सरगुजा संभागों में आने वाले दिनों में बारिश की गतिविधियां लगभग थम जाएंगी और मौसम शुष्क रहेगा। वहीं, दक्षिण छत्तीसगढ़ के कुछ जिलों — विशेष रूप से बस्तर, कांकेर, दंतेवाड़ा और सुकमा — में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना अभी बनी हुई है।

●दक्षिण छत्तीसगढ़ में अब भी सक्रिय बादल-

पिछले 24 घंटों में दक्षिण छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। अंतागढ़ में 100 मिमी, मैनपुर में 70 मिमी और लोहंडीगुडा में 60 मिमी वर्षा हुई। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के कमजोर होने के बाद मानसून की विदाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

◆विदाई के साथ बदलेगा मौसम का मिजाज

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के पूरी तरह लौटने के बाद हवा में नमी घटेगी और तापमान में गिरावट दर्ज होगी। अगले एक सप्ताह में न्यूनतम तापमान में 2 से 4 डिग्री की कमी आने की संभावना है। अक्टूबर के अंतिम सप्ताह तक प्रदेश में हल्की ठंडक महसूस की जा सकेगी।

◆रायपुर में हल्की बौछारों के आसार

रायपुर में रविवार सुबह से आसमान में हल्के बादल छाए रहे। विभाग ने अनुमान जताया है कि दिन में गरज-चमक के साथ हल्की बौछारें पड़ सकती हैं। अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है।

◆फसलों के लिए अनुकूल रहा मानसून सीजन

मौसम विज्ञान केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष प्रदेश में औसत से 6% अधिक वर्षा हुई। बस्तर और सरगुजा संभाग में अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि रायपुर, राजनांदगांव और बलौदाबाजार जिलों में औसत के आसपास वर्षा रही। कुल मिलाकर, इस बार मानसून फसलों और किसानों दोनों के लिए अनुकूल साबित हुआ है।

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