
बालोद। बालोद जिले के प्रसिद्ध सियादेवी मंदिर जाने वाले मार्ग पर गुरुवार शाम श्रद्धालुओं की गंभीर लापरवाही सामने आई। लगातार बारिश के कारण मंदिर मार्ग के रपटे पर कई फीट पानी तेज बहाव के साथ बह रहा था, इसके बावजूद श्रद्धालु जान जोखिम में डालकर रपटा पार करते नजर आए। प्रशासन की लगातार चेतावनियों के बावजूद लोगों द्वारा तेज बहाव की अनदेखी किए जाने से किसी भी समय बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। नारागांव के जंगल क्षेत्र में स्थित सियादेवी मंदिर बारिश के मौसम में जिले का प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल माना जाता है। मंगलवार से लगातार हो रही बारिश के कारण मंदिर तक पहुंचने वाले मार्ग पर बने रपटे में पानी का स्तर लगातार बढ़ा हुआ है। गुरुवार शाम भी स्थिति खतरनाक बनी रही और रपटे पर तेज बहाव साफ दिखाई दे रहा था।
पिछले साल दो युवक बह चुके हैं
इसी रपटे पर वर्ष 2025 में भिलाई से आए दो युवक तेज बहाव में बह गए थे। दोनों युवक करीब 50 मीटर दूर स्थित 25 फीट गहरे झरने की ओर बहते चले गए थे। सौभाग्य से रास्ते में झाड़ियों में फंस जाने के कारण उनकी जान बच गई थी। नारागांव के ग्रामीणों ने तत्काल बचाव अभियान चलाकर दोनों को सुरक्षित बाहर निकाला था। इस घटना के बाद प्रशासन ने लोगों को बारिश के दौरान रपटा पार नहीं करने की सलाह दी थी, लेकिन गुरुवार को फिर वही लापरवाही दोहराई गई।
मौके पर नहीं दिखी पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तेज बहाव के बावजूद कई श्रद्धालु पैदल ही रपटा पार करते रहे। मौके पर न तो प्रभावी बैरिकेडिंग दिखाई दी और न ही श्रद्धालुओं को रोकने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात नजर आया। तेज बहाव के कारण किसी भी समय संतुलन बिगड़ने से बड़ा हादसा हो सकता था।
ग्रामीणों ने उठाई स्थायी पुल की मांग
नारागांव के उप सरपंच जगन्नाथ साहू ने बताया कि हर वर्ष बारिश के मौसम में रपटे पर पानी भर जाने से श्रद्धालुओं और ग्रामीणों की जान खतरे में पड़ जाती है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से यहां स्थायी बड़े पुल के निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बारिश के दौरान रपटे पर आवागमन तत्काल रोका जाए और स्थायी समाधान के रूप में पुल निर्माण की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए।
प्रशासन की अपील
जिला प्रशासन लगातार लोगों से उफनते नदी-नालों, रपटों और पुल-पुलियों को पार नहीं करने की अपील कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि कुछ मिनटों की जल्दबाजी जानलेवा साबित हो सकती है। लगातार हो रही बारिश को देखते हुए प्रशासन ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों से विशेष सावधानी बरतने और जलभराव वाले मार्गों से दूर रहने की अपील की है। सियादेवी मंदिर मार्ग पर सामने आई यह स्थिति एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर रही है कि बार-बार चेतावनियों और पूर्व हादसों के बावजूद जोखिम भरे स्थानों पर प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था और स्थायी आधारभूत ढांचे की व्यवस्था कब तक नहीं हो पाएगी।