
रायपुर। छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रमुख डॉ. अजय यादव जेल से रिहा होने के बाद सीधे रायपुर जिले के नकटी (सम्मानपुर) गांव पहुंचे। यहां उन्होंने प्रशासनिक कार्रवाई से प्रभावित परिवारों से मुलाकात की, ध्वस्त किए गए मकानों का निरीक्षण किया और ग्रामीणों के साथ विस्तृत बैठक की। बैठक के दौरान डॉ. यादव ने कहा कि संगठन प्रभावित 77 परिवारों को न्याय दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ेगा और आवश्यकता पड़ने पर उच्च न्यायालय तथा अन्य न्यायिक मंचों का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी शुरुआत से ही सम्मानपुर के ग्रामीणों के साथ खड़ी रही है। उनका आरोप था कि जब तक संगठन का नेतृत्व आंदोलन में सक्रिय था, तब तक मकानों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, लेकिन उनके और जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के अध्यक्ष अमित बघेल के जेल जाने के बाद प्रशासन ने 77 परिवारों के मकानों को अवैध बताते हुए ध्वस्त कर दिया।
कानूनी प्रतिवेदन तैयार करने का दावा
बैठक में संगठन की ओर से दावा किया गया कि पूरे मामले पर विस्तृत कानूनी प्रतिवेदन तैयार किया गया है। इसमें राजस्व अभिलेखों, ग्राम सभा के प्रस्तावों, शासन के दिशा-निर्देशों और सर्वोच्च न्यायालय के संबंधित निर्णयों का अध्ययन शामिल किया गया है। संगठन का कहना है कि यदि ग्राम सभा के अधिकारों की अनदेखी हुई है या निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई है, तो इसकी न्यायिक समीक्षा आवश्यक है।
मुफ्त कानूनी सहायता का ऐलान
छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने घोषणा की कि प्रभावित परिवारों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। संगठन जरूरत पड़ने पर न्यायालय में याचिका दायर करेगा और मुकदमे की कानूनी प्रक्रिया का खर्च भी वहन करेगा। इसके अलावा संगठन ने ध्वस्तीकरण से जुड़े आदेश, नोटिस, राजस्व रिकॉर्ड और अन्य प्रशासनिक दस्तावेजों की वैधानिक जांच कराने की मांग की है।
पुनर्वास और मुआवजे तक जारी रहेगा आंदोलन
डॉ. अजय यादव ने कहा कि संगठन का संघर्ष किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं, बल्कि ग्रामीणों के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रभावित परिवारों को उचित पुनर्वास और मुआवजा मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि प्रभावित परिवारों की स्थिति को मानवीय दृष्टिकोण से देखते हुए उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान किया जाए।
प्रभावित परिवारों की प्रमुख मांगें
- 77 प्रभावित परिवारों की ओर से अदालत में कानूनी कार्रवाई।
- ध्वस्तीकरण से जुड़े सभी आदेशों और दस्तावेजों की जांच।
- नियमों के उल्लंघन की स्थिति में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई।
- सभी प्रभावित परिवारों को मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराना।
- पुनर्वास और मुआवजा मिलने तक आंदोलन जारी रखना।
नकटी गांव में डॉ. अजय यादव की इस यात्रा को प्रशासनिक कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों के समर्थन में संगठन की सक्रिय राजनीतिक और कानूनी पहल के रूप में देखा जा रहा है।