शराब घोटाला मामले में ED की छापेमारी: रामगोपाल अग्रवाल के रायपुर-धमतरी ठिकानों पर कार्रवाई, दुर्ग में बिल्डरों के परिसरों की तलाशी

शराब घोटाला मामले में ED की छापेमारी: रामगोपाल अग्रवाल के रायपुर-धमतरी ठिकानों पर कार्रवाई, दुर्ग में बिल्डरों के परिसरों की तलाशी

रायपुर/धमतरी/दुर्ग। छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार सुबह रायपुर, धमतरी और दुर्ग-भिलाई में कई ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। जांच टीमों ने अलग-अलग परिसरों में दस्तावेज, कारोबारी रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन से जुड़े कागजात खंगाले। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा बलों की तैनाती भी की गई। रायपुर और धमतरी में कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल से जुड़े परिसरों पर कार्रवाई हुई, जबकि दुर्ग में रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े सजल जैन और विश्वास गुप्ता के ठिकानों पर जांच की गई। हालांकि, ED की ओर से कार्रवाई के संबंध में अभी विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

रामगोपाल अग्रवाल के दो ठिकानों पर करीब 9 घंटे कार्रवाई

रायपुर के अनुपम नगर स्थित रामगोपाल अग्रवाल के निवास और धमतरी के सिहावा रोड स्थित उनके घर पर ED की टीम पहुंची। धमतरी में करीब 9 घंटे तक चली कार्रवाई के बाद टीम कुछ दस्तावेज अपने साथ ले गई। रामगोपाल अग्रवाल को शराब, कोल और कस्टम मिलिंग से जुड़े मामलों में आरोपी बनाया गया है। करीब आठ दिन पहले ED ने उन्हें गिरफ्तार कर रायपुर की अदालत में पेश किया था।

धमतरी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन

रामगोपाल अग्रवाल के धमतरी स्थित घर पर ED की कार्रवाई की खबर के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता मौके पर जुट गए और धरने पर बैठ गए। कार्यकर्ताओं ने ED और केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कांग्रेस प्रवक्ता शैलेश नितिन त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि रामगोपाल अग्रवाल पहले से ED की हिरासत में हैं, ऐसे में उनके परिवार के घर कार्रवाई कर परिजनों को परेशान किया जा रहा है। धमतरी विधायक ओंकार साहू ने भी कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि परिवार को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष तारिणी चंद्राकर ने आरोप लगाया कि भाजपा राजनीतिक द्वेष के चलते केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है।

इन आरोपों पर भाजपा या ED की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

करीबी कारोबारी अनूप अग्रवाल के घर भी पहुंची टीम

रायपुर के रवि नगर स्थित कारोबारी अनूप अग्रवाल के घर पर भी ED की टीम ने तलाशी ली। अनूप अग्रवाल को रामगोपाल अग्रवाल का करीबी बताया जाता है। टीम ने उनके आवास पर दस्तावेज और कारोबारी रिकॉर्ड की जांच की। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों की मौजूदगी रही।

दुर्ग में रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े ठिकानों पर दबिश

दुर्ग में ED की टीम ने सुबह करीब 6 बजे सजल जैन और विश्वास गुप्ता से जुड़े परिसरों पर कार्रवाई शुरू की। करीब सात अधिकारियों की टीम अलग-अलग ठिकानों पर दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रही है। जानकारी के मुताबिक, गांधी चौक स्थित जय आनंद परिसर, जैन गली और डॉक्टर ताम्रकार के आसपास सजल जैन से जुड़े परिसरों में तलाशी ली गई। शनिचरी बाजार स्थित श्रीराम हार्डवेयर में भी विश्वास गुप्ता से जुड़े ठिकाने पर जांच की जानकारी सामने आई है। सजल जैन का संबंध रिद्धि-सिद्धि बिल्डर्स से बताया जाता है, जबकि विश्वास गुप्ता भी इस बिल्डर समूह से जुड़े रहे हैं। हालांकि, ED की मौजूदा कार्रवाई किन विशिष्ट लेन-देन या दस्तावेजों के आधार पर की जा रही है, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

अधिकारियों के पैसे निवेश होने की चर्चा, पुष्टि नहीं

जांच के दौरान यह चर्चा भी सामने आई कि कुछ अधिकारियों का पैसा कथित तौर पर रियल एस्टेट कारोबार में लगा हो सकता है। हालांकि, इस दावे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे फिलहाल केवल चर्चा के स्तर पर ही देखा जा रहा है। कार्रवाई वाले परिसरों में सुरक्षा के लिए CRPF के जवान तैनात रहे। बताया गया कि ED ने दुर्ग के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भी कार्रवाई की जानकारी दी है।

पहले भी जांच एजेंसियों की कार्रवाई हो चुकी है

दुर्ग में सजल जैन और विश्वास गुप्ता से जुड़े परिसरों पर इससे पहले भी ACB की कार्रवाई होने की जानकारी सामने आई है। ED की ताजा कार्रवाई के बाद एक बार फिर इन कारोबारियों से जुड़े वित्तीय लेन-देन जांच के दायरे में आ गए हैं।

क्या है छत्तीसगढ़ का कथित शराब घोटाला?

जांच एजेंसियों के मुताबिक, 2019 से 2022 के बीच राज्य की सरकारी शराब बिक्री व्यवस्था में कथित सिंडिकेट बनाकर अवैध शराब बिक्री, कमीशनखोरी और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। ED और EOW की जांच में करीब 3,200 करोड़ रुपए के कथित घोटाले का दावा किया गया है। मामले में अधिकारियों, कारोबारियों और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों के नाम सामने आए हैं। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच एवं अदालती कार्यवाही जारी है।

कोल लेवी मामले की भी जांच

छत्तीसगढ़ के कथित कोल लेवी मामले में भी 2020 से 2022 के बीच कोयला परिवहन और खनन से जुड़े कारोबारियों से अवैध वसूली के आरोप हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस नेटवर्क के जरिए करीब 540 करोड़ रुपए की कथित अवैध लेवी वसूली गई। इस मामले में भी अधिकारियों, कारोबारियों, बिचौलियों और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों के नाम सामने आए हैं। आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी बाकी है। ED की ताजा छापेमारी के बाद अब जांच एजेंसी की ओर से बरामद दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।

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