रायपुर। छत्तीसगढ़ किसान मितान महासंघ ने किसानों की बदहाल स्थिति और प्रशासनिक अव्यवस्था के खिलाफ कड़ी नाराजगी जताई है। महासंघ के अध्यक्ष कमलेश सिंह राजपूत ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि आज किसान हर स्तर पर परेशान है, लेकिन न तो अधिकारी और न ही कोई राजनेता किसानों की बात सुनने को तैयार है। महासंघ का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा किए गए “सभी अभिलेख ऑनलाइन” करने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। पहले की तुलना में अब किसानों को नामांतरण, सीमांकन, बटांकन, डायवर्सन और त्रुटि सुधार जैसे छोटे-छोटे कार्यों के लिए तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और पटवारी के दफ्तरों के ज्यादा चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि विभागीय त्रुटियों के चलते कई किसानों की भूमि, जिसका प्रमाणीकरण वर्षों पहले हो चुका था, ऑनलाइन रिकॉर्ड में विक्रेता के नाम दर्ज दिखा रही है। ऐसे मामलों में किसानों को फिर से प्रमाणीकरण की लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। महासंघ ने आरोप लगाया कि शासन की अव्यवस्था के चलते राजस्व अधिकारी और कर्मचारी बार-बार ऑनलाइन कार्य का बहिष्कार कर रहे हैं, जिससे जुलाई से अब तक बटांकन और भूमि संबंधित कार्य बुरी तरह प्रभावित हैं। किसान लगातार कलेक्टर, कमिश्नर और राजस्व कर्मचारियों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन समाधान नहीं मिल रहा।
महासंघ ने कहा कि किसानों की समस्याएं केवल राजस्व विभाग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खाद-बीज की कमी, सिंचाई व बिजली व्यवस्था, मुआवजा प्रकरण, भूमि अर्जन और मवेशियों की समस्या ने भी उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
अध्यक्ष राजपूत ने किसानों से आह्वान किया है कि अब समय आ गया है कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एकजुट हों और सरकार के सामने अपनी बात मजबूती से रखें। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है, जब-जब किसानों