20 साल पुराने जग्गी हत्याकांड में आज हाईकोर्ट का फैसला संभावित , CBI रिपोर्ट और अमित जोगी की भूमिका पर टिकी नजरें

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में आज गुरुवार को अहम फैसला आने की उम्मीद है। मामले की अंतिम सुनवाई के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद वर्मा की स्पेशल डिवीजन बेंच गठित की गई है। करीब दो दशक पुराने इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा पेश 11,000 पन्नों की चार्जशीट और जांच रिपोर्ट पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। इस रिपोर्ट में अमित जोगी के खिलाफ भी आरोप दर्ज किए गए हैं। हालांकि, इससे पहले उन्हें साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर फिर खुला मामला
यह केस सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दोबारा हाईकोर्ट में खोला गया है। पूर्व में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच दोषियों की सजा को बरकरार रख चुकी है, लेकिन CBI की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने विस्तृत सुनवाई के लिए मामला वापस भेज दिया। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान सभी पक्षों के वकील कोर्ट में उपस्थित रहे। अमित जोगी के वकील ने केस की फाइल उपलब्ध नहीं होने का हवाला देते हुए समय मांगा, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया और CBI को तत्काल दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

2003 में हुई थी हत्या
4 जून 2003 को एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में कुल 31 आरोपियों को नामजद किया गया था, जिनमें से 28 को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। दो आरोपी सरकारी गवाह बन गए थे, जबकि अमित जोगी को 2007 में सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था।

राजनीतिक साजिश के आरोप
मृतक के बेटे सतीश जग्गी की ओर से दायर अपील में आरोप लगाया गया है कि यह हत्या तत्कालीन राज्य सरकार की साजिश का हिस्सा थी। उनके वकील ने कोर्ट में तर्क दिया कि जांच के दौरान सबूतों को प्रभावित किया गया और साजिश के पहलू को नजरअंदाज किया गया।

फैसले पर टिकी नजरें
अब केस के दोबारा खुलने के बाद कानूनी और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर न सिर्फ न्यायिक दृष्टि से बल्कि राज्य की राजनीति पर भी पड़ सकता है। सभी पक्षों की निगाहें आज आने वाले फैसले पर टिकी हुई हैं, जो इस लंबे समय से लंबित मामले को नया मोड़ दे सकता है।

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