जामगांव आर (स्पेशल रिपोर्ट )। दुर्ग जिले के पाटन क्षेत्र अंतर्गत ग्राम जामगांव (आर) को ब्लॉक का दर्जा दिलाने की मांग अब सिर्फ एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि राजनीतिक उपेक्षा और सरकारी लापरवाही का प्रतीक बन चुकी है। करीब डेढ़ दशक से चली आ रही यह मांग आज भी अधूरी है, जबकि 2016 में मंजूरी मिलने के खबर के बाद भी यह मामला शासन-प्रशासन की फाइलों में ही कैद रह गई। इस मामले में स्थानीय लोगों का आरोप है कि भाजपा और कांग्रेस—दोनों ही दलों के नेताओं ने इस मुद्दे पर सिर्फ राजनीति की, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं की। जनता का कहना है कि नेताओं ने हमेशा अपने राजनीतिक फायदे-नुकसान को प्राथमिकता दी, जबकि दक्षिण पाटन क्षेत्र की इस मूलभूत जरूरतों को नजरअंदाज किया गया। यहाँ उपतहसील कार्यालय सहित पुलिस थाना, शासकीय कालेज, विद्युत वितरण केंद्र संचालित हैं बावजूद यहाँ स्वास्थ्य सुविधाएं शून्य हैं,लम्बे समय से ग्रामीणों को इलाज के लिए पाटन, दुर्ग या भिलाई जाना पड़ता है, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ते हैं।इसी कारण यहाँ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) की स्थापना जैसी मांगें लगातार उठती रही हैं। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भी गहरी नाराजगी है कि वर्षों तक भाजपा -कांग्रेस दोनों की सरकारें रहने के बावजूद जामगांव (आर) को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की सुविधा तक नही मिल सकी,यह मुद्दा अब क्षेत्र में जनचर्चा का विषय बन गया है। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों सरकारों के दौरान यह मुद्दा बार-बार उठा, लेकिन हर बार आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। अब यह मामला जनचर्चा से आगे बढ़कर जनआक्रोश और संभावित आंदोलन का रूप लेता दिख रहा है।यदि सरकार समय रहते निर्णय नहीं लेती, तो आने वाले समय में यह मुद्दा और बड़ा बन सकता है। ग्रामीणों को अब भी उम्मीद है कि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक पहल होगी।
📊 क्यों जरूरी है जामगांव (आर) को ब्लॉक बनाना?
यह क्षेत्र के 55-60 गांवों का मुख्य केंद्र है,जनसंख्या और भौगोलिक विस्तार बड़ा है,यहाँ उपतहसील, थाना, कॉलेज, बिजली कार्यालय तो है लेकिन ब्लॉक और तहसील नही होने से लोगो राजस्व संबंधित कार्यों और पंचयतो व दीगर विभागों के कामकाज के लिए पाटन और जिले की दुरी तय करनी पड़ती हैं,स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक नियंत्रण के लिए भी जामगांव आर को व्लॉक का दर्जा मिलना जरूरी है।
🏛️ उपतहसील बनने के बाद बढ़ी थी उम्मीद-
ग्राम पंचायत जामगांव आर के सरपंच रूपेंद्र शुक्ला ने बताया कि वर्ष 2000-01 में तत्कालीन राजस्व मंत्री भूपेश बघेल की पहल पर जामगांव (आर) को उपतहसील का दर्जा मिला था। इससे प्रशासनिक गतिविधियां बढ़ीं, लेकिन अब भी पूर्ण तहसील और ब्लॉक बनना जरूरी है, तभी लोगों को वास्तविक सुविधा मिल पाएगी। पूर्व सरपंच कन्हैया लाल साहू ने कहा— हमने पंचायत और राजनीतिक स्तर पर इसके लिए लगातार प्रयास किए थे,इस मुद्दे को जन-जन तक पहुंचाया, जिसे जनता का व्यापक समर्थन मिला, लेकिन आज तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।
📂 वर्ष 2016 में मंजूरी की खबर के बाद भी फाइलों में कैद-
पूर्व जिला पंचायत सदस्य जयप्रकाश चंद्राकर का मानना है—
“जामगांव (आर) को ब्लॉक बनाने से विकास कार्यों में तेजी आएगी और पंचायतों को सीधा लाभ मिलेगा। स्थानीय प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत होगा। हमने इस दिशा में काफी प्रयास किए हैं, लेकिन अब तक निर्णय लंबित है। वहीं किसान नेता भगवान सिंह चंद्राकर ने बताया—“2012-13 में तत्कालीन विधायक विजय बघेल के नेतृत्व में प्रक्रिया ब्लॉक बनाने के लिए जरूरी प्रशासनिक प्रक्रियायें शुरू हुई थी तब जांच, जनसुनवाई और सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद प्रस्ताव राष्ट्रपति तक भेजा गया। 2016 में मंजूरी की खबर आई, लेकिन उसके बाद शासन स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह क्षेत्रवासियो के साथ अन्याय है।”
🏥 प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा तक नही,जनता बेहाल-
क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को लेकर भी नाराजगी है
,जनपद सदस्य रामकुमार चंद्राकर ने बताया—करीब डेढ़ साल पहले हमने स्वास्थ्य मंत्री से मिलकर जामगांव (आर) में स्वास्थ्य केंद्र की मांग रखी और आवश्यक तथ्य प्रस्तुत किए हैं। वहीं जिला पंचायत सदस्य कल्पना नारद साहू ने कहा “जिला पंचायत की बैठक में इस मुद्दे को उठाया गया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से मिलकर पीएचसी की स्थापना के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। जिला पंचायत की बैठक में इस मुद्दे को उठाया गया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से मिलकर पीएचसी की स्थापना के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द सकारात्मक परिणाम मिलेंगे।