बस्तर में बंगाल के मजदूरों की गिरफ्तारी पर गरमाई सियासत : महुआ मोइत्रा का अपहरण का आरोप, महेश कश्यप का पलटवार— “यह बस्तर है, बंगाल नहीं”

रायपुर । बस्तर में पश्चिम बंगाल के 9 मजदूरों की गिरफ्तारी ने छत्तीसगढ़ की सियासत में हलचल मचा दी है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा ने छत्तीसगढ़ पुलिस पर ‘अपहरण’ का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि बस्तर के अल्बेरापाड़ा में निर्माण कार्य में लगे उनके लोकसभा क्षेत्र के मजदूरों को बिना किसी कानूनी सूचना या अनुमति के हिरासत में लेकर जगदलपुर जेल भेज दिया गया।

महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर पुलिस पर अमानवीय व्यवहार का आरोप लगाते हुए कहा, कि यह सीधा अपहरण है। न मजदूरों के परिजनों को सूचित किया गया, न ही राज्य सरकार को। छत्तीसगढ़ पुलिस का यह रवैया असंवैधानिक और क्रूर है। उन्होंने बताया कि इन मजदूरों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 128बी (पहचान छिपाकर आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज कर जेल भेजा गया है।

भाजपा सांसद महेश कश्यप का तीखा पलटवार

बस्तर से भाजपा सांसद महेश कश्यप ने मोइत्रा के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा,
“यह बस्तर है, बंगाल नहीं। यहां पुलिस कानून के मुताबिक काम करती है। TMC जैसी बाहरी पार्टियों को यहां की चिंता करने की ज़रूरत नहीं है।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी मजदूर के दस्तावेज संदिग्ध पाए गए हैं, तो पुलिस जांच करना उसका कर्तव्य है।

दीपक बैज ने भी उठाए सवाल, बताया मानवाधिकार हनन

छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ मिनी इंडिया है, यहां हर राज्य के लोग काम करते हैं। मजदूरों को बिना आधार के रोहिंग्या बताकर गिरफ्तार करना नागरिक अधिकारों का हनन है।

बंगाल पुलिस की रिपोर्ट से नया मोड़

इस पूरे विवाद के बीच बंगाल के नदिया जिले की थानारपाड़ा पुलिस ने एक रिपोर्ट जारी कर मामले को नया मोड़ दे दिया। रिपोर्ट के अनुसार:

सभी 9 मजदूर भारतीय नागरिक हैं।

उनके खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।

सभी कृष्णनगर (जिला नदिया, बंगाल) के निवासी हैं।

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