
पाटन/स्पेशल रिपोर्ट। दुर्ग जिले के पाटन ब्लॉक से सामने आई तस्वीरें “हरियाली अभियान” की हकीकत बयां कर रही हैं—जहां कागजों में हरियाली लहलहा रही है, वहीं जमीन पर सूखे पौधे और टूटे ट्री गार्ड सिस्टम की पोल खोल रहे हैं। जानकारी के अनुसार मनरेगा के तहत वर्ष 2024-25 में पाटन के बेल्हारी, टेमरी, धमना, सोनपुर, तरीघाट, केसरा और सिकोला गांवों में करीब 2 करोड़ 38 लाख रुपये पौधारोपण के लिए स्वीकृत किए गए थे। उद्यानिकी विभाग और बिहान सीएलएफ के जरिए हजारों पौधे लगाने, ट्री गार्ड खरीदने और मजदूरी भुगतान के दावे किए गए। लेकिन जमीनी हकीकत चौंकाने वाली है—90 से 95 फीसदी पौधे सूख चुके हैं, और कई जगहों पर ट्री गार्ड या तो टूटे पड़े हैं या पूरी तरह गायब हैं।पाटन का यह मामला सिर्फ सूखे पौधों की कहानी नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही और निगरानी की नाकामी का आईना है। अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो “हरियाली” के नाम पर ऐसे खेल जनता के भरोसे को पूरी तरह खत्म कर देंगे।
⚖️ जिम्मेदारी का खेल—कौन है दोषी?
पौधों की देखरेख की जिम्मेदारी महिला स्व-सहायता समूहों (बिहान) को दी गई थी, लेकिन जब पौधे ही नहीं बचे तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
ग्रामीणों का आरोप है—
👉 जमीन पर काम नगण्य, लेकिन मजदूरी का भुगतान जारी
👉 मस्टररोल के जरिए फर्जी भुगतान की आशंका
👉 विभागों के बीच जिम्मेदारी टालने का खेल
🤐 अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल
जनपद पंचायत पाटन के सीईओ ने इसे उद्यानिकी विभाग का काम बताकर पल्ला झाड़ लिया, हलाकि इन कार्यों में उद्यानिकी विभाग को कार्य एजेंसी नियुक्त किया गया था लेकिन भुगतान प्रक्रिया में जनपद पंचायत और मनरेगा सेल की भूमिका भी सामने आ रही है। इन गावों में मास्टरोल संबंधित पंचायतों के रोजगार सहायक के माध्यम से निकलता हैं बकायादा पोर्टल पर आनलाइन हाजिरी भी वही दर्ज करते रहे, वेंडर भुगतान की प्रक्रिया में भी जनपद पंचायत के मनरेगा सेल के तकनीकी सहायक द्वारा इसका सत्यापन किया गया। उद्यानिकी विभाग के अधिकारी इस पूरे मामले पर चुप हैं—और यही चुप्पी अब शक को और गहरा कर रही है।
❓ जनता पूछ रही है
•करोड़ों खर्च के बाद भी पौधे क्यों नहीं बचे?
•ट्री गार्ड का भुगतान किस आधार पर हुआ?
•मॉनिटरिंग किसने की और कब?
क्या इसमें अधिकारियों और सप्लायर की मिलीभगत है?
📦 क्या कहते हैं क्षेत्र के जनप्रतिनिधि–
🗣️ खेमलाल देशलहरे (सभापति, जनपद पंचायत पाटन)
“यह बड़ा प्लांटेशन स्कैम है। 95% पौधे खत्म हो चुके हैं, फिर भी भुगतान जारी रहा। मेरे खुद के गांव में ये हुआ हैं,जांच कर रिकवरी होनी चाहिए।”
🗣️ नारद साहू (भाजपा नेता)
“मामला बैठक में उठा, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। अफसर सरकार की मंशा पर पानी फेर रहे हैं।”
🗣️ लोकेश महलवार (सरपंच, धमना)
“इतना खराब काम पहले नहीं देखा। इसकी सरकारी और सोशल ऑडिट जरूरी है।”
🗂️ अधिकारी का पक्ष
जिला पंचायत दुर्ग के एपीओ के मुताबिक—जहां जहां काम हुए और संतोषजनक परिणाम नही आया उसकी समीक्षा की जा रही है। कलेक्टर के निर्देशानुसार वसूली और कार्रवाई का प्रस्ताव तैयार होगा।”