रायपुर ! छत्तीसगढ़ में बुधवार से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राज्य सरकार ने इस वर्ष 2,739 धान उपार्जन केंद्र बनाए हैं, लेकिन पहले ही दिन केवल 10% यानी 195 केंद्रों में धान खरीदी हो पाई। इन केंद्रों से कुल 19,464 क्विंटल धान की खरीदी दर्ज की गई।
◆ कर्मचारियों की हड़ताल से किसानों को परेशानी
सहकारी समितियों के कुछ कर्मचारियों की आंशिक हड़ताल के कारण किसानों को टोकन प्राप्त करने में परेशानी का सामना करना पड़ा। कई स्थानों पर किसान सुबह से केंद्रों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन टोकन जारी न होने से खरीदी में बाधा आई। स्थिति बिगड़ते देख सरकार ने धान खरीदी प्रक्रिया में किसी भी तरह की रुकावट रोकने एस्मा (ESMA) लागू कर दिया है।
सरकार ने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि धान खरीदी राज्य की अत्यंत महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, इसलिए इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
◆ जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में शुरू हुआ खरीदी कार्य
कई जिलों में जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में पूजा-अर्चना कर धान खरीदी की औपचारिक शुरुआत हुई। हड़ताल के बावजूद शासन ने 2,739 आउटसोर्स डेटा एंट्री ऑपरेटरों की तैनाती कर खरीदी को प्रभावित होने से बचाया। सहकारिता विभाग के कर्मचारियों ने भी जिम्मेदारी निभाते हुए कार्य जारी रखा।
◆ ऑनलाइन टोकन प्रणाली से बढ़ी पारदर्शिता
इस वर्ष धान खरीदी को अधिक पारदर्शी बनाने ‘ऑनलाइन टोकन’ और ‘तुंहर टोकन’ प्रणाली लागू की गई है। पहले दिन जारी 2,029 टोकन में से 1,912 टोकन तुंहर टोकन के माध्यम से लिए गए।
किसानों की सुविधा के लिए उपार्जन केंद्रों में पानी, छाया, शौचालय और प्राथमिक उपचार जैसी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।
◆ शिकायतों के लिए हेल्पलाइन सक्रिय
सरकार ने 1800-233-3663 टोलफ्री हेल्पलाइन और नोडल अधिकारियों को भी सक्रिय कर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने निर्देश दिए कि किसानों की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता रहे और खरीदी कार्य समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से संपन्न हो।
◆31 जनवरी तक चलेगी खरीदी
छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से 31 जनवरी 2026 तक धान खरीदी की जाएगी। प्रति एकड़ अधिकतम 21 क्विंटल तक धान खरीदा जाएगा। सभी केंद्रों पर मापक यंत्र, तौल कांटा, बारदाना, कंप्यूटर और इंटरनेट जैसी आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गई हैं। पहले दिन की धीमी शुरुआत के बावजूद सरकार ने स्पष्ट किया है कि आने वाले दिनों में खरीदी प्रक्रिया गति पकड़ेगी और किसानों की सुविधाओं में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।