निकुम में चल रहे शिव महापुराण कथा में जुटे लाखों श्रद्धालु, पंडित मिश्रा ने कहा- एक लोटा जल से हिला भ्रमजाल,भगवान को इंसान मत बनाइए…

निकुम में चल रहे शिव महापुराण कथा में जुटे लाखों श्रद्धालु, पंडित मिश्रा ने कहा- एक लोटा जल से हिला भ्रमजाल,भगवान को इंसान मत बनाइए…

दुर्ग। दुर्ग जिले के निकुम गांव में प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा द्वारा आयोजित पांच दिवसीय शिव महापुराण कथा के चौथे दिन श्रद्धा की लहर और प्रशासनिक असंतोष दोनों देखने को मिले। 19 जून से चल रही इस कथा में अब तक करीब तीन लाख से ज्यादा श्रद्धालु शामिल हो चुके हैं, जिससे क्षेत्र में भक्ति और भीड़ दोनों का संगम बना हुआ है।

कलश यात्रा से हुई थी शुरुआत, भीड़ में लगातार बढ़ोतरी/
कथा की शुरुआत 18 जून को 3100 महिलाओं की भव्य कलश यात्रा के साथ हुई थी। प्रतिदिन दोपहर 1 से 4 बजे तक हो रही इस कथा में श्रद्धालु केवल दुर्ग ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों और अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। सुबह 5 बजे से ही लोग कथा स्थल पर जगह पाने पहुंच जाते हैं, और 10 बजे के बाद डोम शेड पूरी तरह भर जाते हैं।

पंडित प्रदीप मिश्रा का प्रहार: “भगवान को भगवान ही रहने दीजिए
अपने प्रवचन के दौरान पंडित मिश्रा ने समाज में फैलाए जा रहे अंधविश्वास और स्वार्थपरक प्रचारों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “आज कुछ लोगों को ‘एक लोटा जल’ की महिमा चुभ रही है, क्योंकि अब लोग सीधे शिव मंदिर जा रहे हैं, किसी स्वघोषित चमत्कारी के पास नहीं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि सच्ची भक्ति वही है जो सीधे भोलेनाथ से जुड़ती है, न कि किसी दलाल से।

प्रशासन की ट्रैफिक एडवाइजरी, लेकिन ग्रामीणों में नाराज़गी
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन और ट्रैफिक विभाग ने विस्तृत यातायात योजना जारी की है। विभिन्न जिलों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए गोड़ेला तिराहा स्थित खुरसुल पार्किंग स्थल निर्धारित किया गया है, जहां से उन्हें पैदल कथा स्थल तक जाना होता है। हालांकि, ग्राम निकुम के ग्रामीणों और सरपंच ने प्रशासन की सख्ती को लेकर नाराजगी जताई है। सरपंच भागवत राम पटेल ने कलेक्टर और एसपी को 18 बिंदुओं पर आधारित शिकायत सौंपी है। उनका कहना है कि आयोजन की NOC ग्राम पंचायत से नहीं ली गई, और खाद, बीज, केसीसी, स्कूल, अस्पताल, खेतों के रास्ते आदि सब बाधित हो गए हैं। गांव में टॉयलेट, सफाई और भोजन वितरण की उचित व्यवस्था नहीं होने के कारण ग्रामीणों में नाराजगी है। खुले में फेंका जा रहा भोजन मवेशियों के बीमार होने और मौत का कारण भी बना ।

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