
रायपुर। छत्तीसगढ़ में “वर्क फ्रॉम होम” की मांग अब राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बनती जा रही है। बढ़ती महंगाई, पेट्रोल-डीजल की अनिश्चितता और संभावित ईंधन संकट के बीच छत्तीसगढ़ अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन ने राज्य सरकार से जरूरत के अनुसार सरकारी दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था लागू करने की मांग की है। इस मांग को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच बयानबाजी भी तेज हो गई है। फेडरेशन ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कहा है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के कारण पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता और कीमतों को लेकर चिंता बढ़ रही है। ऐसे में ईंधन बचत और अनावश्यक आवागमन कम करने के लिए व्यावहारिक कदम उठाना जरूरी है। कर्मचारियों का कहना है कि डिजिटल दौर में कई सरकारी काम ऑनलाइन माध्यम से आसानी से संचालित किए जा सकते हैं, इसलिए जरूरत पड़ने पर वर्क फ्रॉम होम एक प्रभावी विकल्प साबित हो सकता है।
पीएम मोदी की अपील का दिया हवाला
फेडरेशन ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऊर्जा बचत और संसाधनों के सीमित उपयोग संबंधी अपील का भी जिक्र किया है। कर्मचारियों का कहना है कि जब केंद्र सरकार ईंधन बचत पर जोर दे रही है, तो राज्यों को भी व्यावहारिक कदम उठाने चाहिए। फेडरेशन के मुताबिक, आंशिक रूप से वर्क फ्रॉम होम लागू होने से ईंधन की बचत, ट्रैफिक दबाव में कमी और प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिल सकती है। साथ ही प्रशासनिक कार्यों को डिजिटल माध्यम से और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
सरकार बोली- जरूरत पड़ी तो विकल्प खुला
इस मुद्दे पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि परिस्थिति और आवश्यकता के अनुसार दोनों विकल्प संभव हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारी साइकिल से भी कार्यालय आ सकते हैं और जरूरत पड़ने पर वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था भी लागू की जा सकती है। सरकार फिलहाल मितव्ययिता और ऊर्जा बचत के उपायों पर काम कर रही है।
कांग्रेस ने साधा निशाना
वहीं कांग्रेस ने इस पूरे मुद्दे को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर हमला बोला है। पूर्व मंत्री शिव कुमार डहरिया ने कहा कि सरकार महंगाई और आर्थिक चुनौतियों पर नियंत्रण पाने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण कर्मचारियों को अब वर्क फ्रॉम होम जैसी मांग उठानी पड़ रही है।
मितव्ययिता अभियान के बीच बढ़ी बहस
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने हाल ही में सरकारी वाहनों के सीमित उपयोग, पेट्रोल-डीजल खर्च कम करने, वर्चुअल बैठकों को बढ़ावा देने और बिजली बचत जैसे निर्देश जारी किए हैं। इसी बीच कर्मचारियों की वर्क फ्रॉम होम मांग ने नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।