YC न्यूज़ डेस्क । देश के तीन प्रमुख चुनावी राज्यों—असम, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में गुरुवार को विधानसभा चुनाव के लिए रिकॉर्डतोड़ मतदान दर्ज किया गया। मतदाताओं के उत्साह ने लोकतंत्र के प्रति मजबूत विश्वास को एक बार फिर साबित किया है। असम में राज्य गठन (1950) के बाद पहली बार सबसे अधिक 85.91% मतदान दर्ज किया गया, जिसने 2016 के 84.7% के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। राज्य के 35 में से 26 से अधिक जिलों में 80% से ज्यादा वोटिंग हुई। साउथ सलमारा मनकचर जिले में सर्वाधिक 95.56% मतदान हुआ, जबकि वेस्ट कार्बी आंगलॉन्ग में सबसे कम 75.25% वोटिंग दर्ज की गई। 126 सीटों पर 41 दलों के 722 उम्मीदवारों की किस्मत अब ईवीएम में बंद है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बढ़े हुए मतदान को सभी समुदायों की सक्रिय भागीदारी का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि इस बार पारंपरिक रूप से कम मतदान करने वाले वर्गों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिससे कुल मतदान प्रतिशत में वृद्धि हुई।
वहीं पुडुचेरी में भी मतदान ने इतिहास रच दिया। यहां 89.87% मतदान हुआ, जो आजादी के बाद का अब तक का सबसे अधिक आंकड़ा है। इससे पहले 2006, 2011 और 2016 में करीब 85% मतदान हुआ था। पुडुचेरी जिले में 90.47% और कराईकल में 86.77% वोटिंग दर्ज की गई। 30 सीटों वाले इस केंद्र शासित प्रदेश में करीब 10 लाख मतदाता हैं। केरल में भी इस बार 49 सालों में दूसरी सबसे अधिक 78.27% वोटिंग दर्ज की गई। 1977 में 79.2% का रिकॉर्ड अब भी सर्वोच्च बना हुआ है। राज्य के 14 जिलों में से 2 जिलों में 80% से अधिक मतदान हुआ, जबकि 10 जिलों में 70% से ज्यादा वोटिंग दर्ज की गई। कोझिकोड में सर्वाधिक 81.32% मतदान हुआ, जबकि पथनमथिट्टा में सबसे कम 70.76% मतदान हुआ।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार केरल में बढ़े मतदान के पीछे कई कारण रहे, जिनमें एंटी-इनकंबेंसी, महिला मतदाताओं की बढ़ी भागीदारी और सबरीमाला जैसे धार्मिक मुद्दों पर जनता की सक्रियता प्रमुख हैं। अब तीनों राज्यों में मतगणना का इंतजार है, जिसके बाद स्पष्ट होगा कि जनता ने किस दल को सत्ता की कमान सौंपी है।