रायपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिला में पकड़ी गई अवैध अफीम की खेती का खुलासा एक नाबालिग लड़की की घटना से हुआ है। बताया जा रहा है कि गांव की यह किशोरी अफीम के खेत में मजदूरी करने जाती थी, जिसे बाद में एक चौकीदार रांची ले गया। इसी घटना के बाद गांव में पंचायत बैठी और धीरे-धीरे अफीम की खेती का पूरा मामला सामने आया। मामला त्रिपुरी ग्राम पंचायत के सरनाटोली मोहल्ले का है, जहां करीब 3.67 एकड़ जमीन पर अफीम की फसल पाई गई। बुधवार को मजिस्ट्रेट आशीष कुमार चंदोहे की मौजूदगी में प्रशासनिक टीम ने फसल उखाड़कर जब्त कर ली। जब्त अफीम की कीमत करीब 2 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है।
300 रुपए में नाबालिगों से कराते थे मजदूरी
ग्रामीणों के मुताबिक खेत में काम कराने के लिए गांव से ही मजदूर जुटाए जाते थे, जिनमें कई नाबालिग भी शामिल थे। मजदूरी के तौर पर उन्हें 300 रुपए प्रतिदिन दिए जाते थे। कुछ ग्रामीणों ने बताया कि उनके बच्चे भी कुछ दिन खेत में काम कर चुके हैं। गांव की 13–14 साल की एक लड़की भी मजदूरी करने जाती थी। अचानक उसके गायब होने पर पता चला कि खेत में तैनात एक चौकीदार उसे लेकर रांची चला गया है। वहां संदेह के आधार पर रेलवे सुरक्षा बल ने पूछताछ की। इस दौरान चौकीदार फरार हो गया, जबकि लड़की ने फोन पर अपने पिता को पूरी घटना बताई। इसके बाद पिता उसे गांव लेकर आए और पंचायत में मामला सामने आया।
झारखंड से छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ रहा नेटवर्क
ग्रामीणों का कहना है कि खेत की रखवाली के लिए झारखंड से आए कुछ चौकीदार स्थानीय लोगों के संपर्क में थे और मजदूरों को बुलवाते थे। जानकारों के मुताबिक झारखंड में अफीम की खेती के खिलाफ सख्ती बढ़ने के बाद तस्कर अब छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों में पैर पसारने लगे हैं। सूत्रों के अनुसार पास के कुसमी क्षेत्र के खजुरी गांव के तुर्रीपानी इलाके में भी करीब डेढ़ एकड़ जमीन पर अफीम की खेती होने की चर्चा है।
डिजिटल रिकॉर्ड में अनाज, जमीन पर अफीम
जिस जमीन पर अफीम की खेती की गई, वह डिजिटल सर्वे रिकॉर्ड में अन्य अनाज के नाम से दर्ज है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि खेत में उगे डोडे खाने से दो मवेशियों की मौत होने की चर्चा है।
100 मजदूरों ने एक घंटे में उखाड़ी फसल
प्रशासन की टीम के पहुंचने से पहले ही सुबह छह बजे करीब 100 मजदूरों को खेत पर बुला लिया गया था। दोपहर में अधिकारियों की मौजूदगी में मजदूरों ने फसल उखाड़ना शुरू किया और करीब एक घंटे में चार महीने की पूरी खेती नष्ट कर दी। बताया जा रहा है कि इस फसल की बुवाई नवंबर की शुरुआत में की गई थी।
लीज पर दिलाने के आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पास के गांव भगचंद का निवासी और भाजपा से जुड़ा नेता जिरमल राम ने ग्रामीणों की जमीन झारखंड के एक व्यक्ति को लीज पर दिलवाई थी। खेत की रखवाली के लिए चौकीदार तैनात रहते थे, जबकि असली सरगना गांव में नहीं आता था।
प्रशासन ने शुरू की जांच
राजेंद्र कटारा (कलेक्टर) और वैभव बैंकर (एसपी) ने बताया कि पूरे मामले की जांच जारी है और संदेह के आधार पर 7 लोगों को हिरासत में लिया गया है।
कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना
घटना की जांच के लिए कांग्रेस की 10 सदस्यीय टीम भी मौके पर पहुंची। टीम में पूर्व विधायक डॉ. प्रीतम राम, भानुप्रताप सिंह और जिला कांग्रेस अध्यक्ष हरिहर यादव समेत अन्य नेता शामिल थे। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश में अब धान की जगह अफीम की खेती चर्चा में है और प्रशासन को इसकी जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई में देरी हुई।
ड्रग नेटवर्क की आशंका
दुर्ग के बाद बलरामपुर में अफीम की खेती पकड़े जाने से राज्य में किसी संगठित ड्रग नेटवर्क के सक्रिय होने की आशंका भी गहराने लगी है। सुरक्षा एजेंसियां अब यह जांच कर रही हैं कि क्या छत्तीसगढ़–झारखंड सीमा के जंगलों में इसी तरह का कोई बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है।