जर्मनी में छत्तीसगढ़ भिलाई के श्रीमंत झा का जलवा, भारत के लिए जीते रजत और कांस्य पदक

भिलाई। छत्तीसगढ़ के भिलाई निवासी अंतरराष्ट्रीय पैरा आर्म रेसलर श्रीमंत झा ने जर्मनी में आयोजित पैरा-आर्मरेसलिंग चैंपियनशिप-2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए रजत और कांस्य पदक जीते हैं। 85 किलोग्राम वर्ग में मिली इस उपलब्धि के साथ उनके अंतरराष्ट्रीय पदकों की कुल संख्या 69 हो गई है। उनकी इस सफलता से छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश का गौरव बढ़ा है।

जर्मनी के खिलाड़ी को हराकर दिखाई ताकत

जर्मनी में आयोजित प्रतियोगिता में विभिन्न देशों के खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। श्रीमंत झा ने कड़े मुकाबलों में अपनी ताकत, तकनीक और खेल कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता के दौरान उन्होंने जर्मनी के खिलाड़ी एरिक होप को हराकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया और भारत के लिए दो पदक जीतने में सफलता हासिल की।.श्रीमंत ने अपनी इस उपलब्धि को देश के अमर शहीद सैनिकों को समर्पित किया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे श्रीमंत ने एक बार फिर साबित किया कि दृढ़ संकल्प, मेहनत और समर्पण के दम पर बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।

69 अंतरराष्ट्रीय पदक, फिर भी सरकारी नौकरी का इंतजार

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने वाले श्रीमंत झा लंबे समय से सरकारी नौकरी और शहीद राजीव पांडे खेल पुरस्कार की मांग कर रहे हैं। उनकी उपलब्धियों के बावजूद इन मांगों पर अब तक निर्णय नहीं होने का मुद्दा चर्चा में है। श्रीमंत ने मई 2018 में भी छत्तीसगढ़ सरकार से सरकारी नौकरी देने की मांग उठाई थी। उस समय उनके नाम विश्वस्तरीय प्रतियोगिताओं में पांच पदक दर्ज थे। उनका कहना था कि सरकारी नौकरी मिलने से परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर होगी और वे आर्थिक चिंताओं से मुक्त होकर खेल पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगे। हालांकि, उन्हें लंबे समय तक निजी कंपनी में काम करके परिवार का खर्च उठाना पड़ा।

खेल पुरस्कार के लिए वर्षों से कर रहे प्रयास

श्रीमंत के अनुसार, वे पिछले पांच से छह वर्षों से शहीद राजीव पांडे खेल पुरस्कार के लिए आवेदन कर रहे हैं। उन्होंने खेल विभाग के अधिकारियों और मुख्यमंत्री कार्यालय तक अपनी मांग पहुंचाई, लेकिन अब तक उन्हें यह सम्मान नहीं मिला है। अगस्त 2024 में भी उन्होंने इस विषय को उठाया था। उस समय उनके नाम 48 अंतरराष्ट्रीय पदक दर्ज थे। खेल पुरस्कार के मामले में पैरा आर्म रेसलिंग की सरकारी खेल व्यवस्था में मान्यता से जुड़ी समस्या भी सामने आई थी। संबंधित खेल संगठन की मान्यता को लेकर नियमों और पात्रता की स्थिति इस मामले में महत्वपूर्ण रही है।

पदक सरकार को सौंपने की बात भी कह चुके हैं

सरकारी नौकरी और खेल पुरस्कार की मांग पूरी नहीं होने पर श्रीमंत अपने पदक सरकार को सौंपने और उनकी नीलामी कराने की बात भी कह चुके हैं। उनकी यह पीड़ा उन खिलाड़ियों की चुनौतियों को सामने लाती है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए पदक जीतने के बावजूद रोजगार और सरकारी सम्मान की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

उपलब्धियों के अनुरूप सम्मान मिलने की उम्मीद

जर्मनी में रजत और कांस्य पदक जीतकर श्रीमंत झा ने अपने अंतरराष्ट्रीय पदकों की संख्या 69 तक पहुंचा दी है। उनकी सफलता देश के लिए गर्व का विषय है। वहीं, सरकारी नौकरी और शहीद राजीव पांडे खेल पुरस्कार को लेकर उनकी लंबित मांगें भी एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं।.अब निगाहें राज्य सरकार के अगले कदम पर हैं। खिलाड़ियों की उपलब्धियों को प्रोत्साहन देने और उन्हें आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में श्रीमंत झा की मांगों पर निर्णय होने की उम्मीद की जा रही है।

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