पाटन। छत्तीसगढ़ सरकार के सुशासन तिहार में जब गांव-गांव से जन समस्याएं और विकास की मांगें जुटाई जा रही थीं, तब पतोरा पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी गहरी नींद में सोए हुए थे। पूर्व जनपद सदस्य चंद्रावती कुर्रे के मुताबिक आश्रित ग्राम देऊरझाल की राजस्व गांव की मांग, मुर्गी पालन, मछली पालन और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसे महत्वपूर्ण आवेदनों को पंचायत ने न तो गंभीरता से लिया, न ही विभाग तक पहुंचाया।
8 से 11 अप्रैल तक आयोजित सुशासन तिहार में पतोरा पंचायत के अंतर्गत आए देऊरझाल गांव की पूर्व जनपद सदस्य चंद्रावती कुर्रे ने बाकायदा रोजगार सहायक पुरुषोत्तम कुर्रे को 11 अगस्त को आवेदन सौंपा। मौके पर पंचायत के अन्य कर्मचारी और कंप्यूटर ऑपरेटर मौजूद थे। लेकिन जब 19 मई को विभाग से जानकारी ली गई, तो यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि ऐसा कोई आवेदन विभाग के पास पहुंचा ही नहीं!
यह न केवल आम जनता के अधिकारों की अवहेलना है, बल्कि छत्तीसगढ़ सरकार के सुशासन तिहार की मूल भावना के साथ भी खिलवाड़ है।
सरपंच ने मानी चूक, कार्रवाई की मांग
ग्राम पंचायत पतोरा के सरपंच ने भी इस घोर लापरवाही को स्वीकार करते हुए कहा, “यह पूरी तरह गलत है। सभी आवेदनों को विभाग में भेजा जाना चाहिए था। जिम्मेदार व्यक्ति पर कार्रवाई की जानी चाहिए।”
सूत्रों के अनुसार, पतोरा पंचायत में कई अन्य आवेदनों को भी विभाग तक नहीं भेजा गया है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश है।
अब सवाल उठता है — क्या प्रशासन दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करेगा? या फिर यह मामला भी फाइलों की धूल में गुम हो जाएगा?