रायपुर, 20 मार्च 2026। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन “छत्तीसगढ़ कर्मचारी चयन मंडल विधेयक” सर्वसम्मति से पारित हो गया। राज्य सरकार ने इसे सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता, एकरूपता और समयबद्धता सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम बताया है।सरकार का कहना है कि इस नए कानून से भर्ती प्रक्रियाओं में होने वाली अनियमितताओं पर रोक लगेगी और युवाओं का भरोसा मजबूत होगा। विधेयक पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि वर्तमान स्वरूप में यह विधेयक सीधी भर्ती में पूर्ण एकरूपता नहीं ला पाएगा और इसमें और सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने सभी विभागों में समान प्रक्रिया और स्पष्ट दिशा-निर्देश लागू करने पर जोर दिया।
वहीं सत्ता पक्ष की ओर से विधायक अजय चंद्राकर ने विपक्ष के सुझावों का स्वागत करते हुए कहा कि भर्ती घोटालों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ऐसे सख्त कानून की जरूरत थी।
मुख्यमंत्री का बयान
मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्मचारी चयन मंडल के गठन से अब भर्ती परीक्षाएं तय कैलेंडर के अनुसार नियमित रूप से आयोजित की जाएंगी। अब तक कई परीक्षाएं 4-5 वर्षों में होती थीं, लेकिन अब हर वर्ष परीक्षा कराने का लक्ष्य तय किया गया है। मंडल में एक अध्यक्ष और तीन सचिव होंगे, जो विभिन्न विभागों की भर्ती प्रक्रिया को एकीकृत करेंगे। साथ ही पाठ्यक्रम समिति और परीक्षा समिति का गठन कर परीक्षा प्रणाली को अधिक व्यवस्थित बनाया जाएगा।
नकल और पेपर लीक पर सख्ती
सदन में परीक्षाओं में नकल और पेपर लीक रोकने के लिए एक सख्त कानून भी पारित किया गया। इसके तहत दोषी पाए जाने पर 3 साल तक की सजा, 10 लाख रुपये तक का जुर्माना और संपत्ति कुर्क करने का प्रावधान किया गया है।
सत्र की झलक
मुख्यमंत्री के अनुसार, इस बजट सत्र में कुल 15 बैठकें आयोजित हुईं, जिसमें कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए और वर्ष 2026-27 का बजट भी मंजूर किया गया। उन्होंने कहा कि राज्य के युवाओं को बेहतर अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।