
जगदलपुर। दक्षिण बस्तर के दंतेवाड़ा जिले में इस बार स्वतंत्रता दिवस का जश्न उन गांवों के लिए खास रहा, जहां कभी नक्सलवाद का डर लोगों की जिंदगी पर हावी था। नक्सल प्रभाव से मुक्त हुए पुरंगेल, लोहागांव, बड़ेपल्ली, बेंगपाल और गुमलनार पंचायत के गिरसापारा में पहली बार स्वतंत्रता दिवस के मौके पर तिरंगा फहराया गया। पहली बार खुले और निर्भय माहौल में राष्ट्रध्वज को लहराते देखकर ग्रामीणों के चेहरे पर उत्साह और गर्व साफ नजर आया। गांवों में भारत माता के जयकारे और देशभक्ति के नारों से माहौल गूंज उठा।
पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में हुआ ध्वजारोहण
पुलिस अधीक्षक चंद्रमोहन सिंह के निर्देशन में दंतेवाड़ा पुलिस और जिला प्रशासन ने पांचों गांवों में स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित किया। कार्यक्रम में पुलिस जवानों और अधिकारियों के साथ प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधि, महिलाएं, युवा और बच्चे शामिल हुए। ध्वजारोहण के बाद ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगान गाया। लंबे समय तक नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे इन इलाकों में पहली बार इस तरह सार्वजनिक रूप से स्वतंत्रता दिवस मनाया जाना ग्रामीणों के लिए खास अनुभव रहा।
बच्चों ने दी देशभक्ति की प्रस्तुतियां
समारोह में बच्चों ने देशभक्ति से जुड़ी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। गांवों में देशभक्ति के गीत गूंजे और ग्रामीणों ने उत्साह के साथ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। पुलिस जवानों ने ग्रामीणों के बीच मिठाई वितरित की, जबकि बच्चों को खेल सामग्री दी गई। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं और जरूरतों की जानकारी भी ली।
साइबर अपराध और नशे से बचाव की दी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को साइबर ठगी से बचाव, नशामुक्ति और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। पुलिस ने लोगों से अनजान लिंक, फोन कॉल और ऑनलाइन लेन-देन के दौरान सावधानी बरतने की अपील की। ग्रामीणों को नशे से दूर रहने और गांव में सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए भी प्रेरित किया गया।
कभी था नक्सलियों का खौफ, अब तिरंगे के नीचे आजादी का उत्सव
दंतेवाड़ा पुलिस के अनुसार क्षेत्र में सुरक्षा के साथ विश्वास और विकास पर भी लगातार काम किया जा रहा है। नक्सल प्रभाव से मुक्त गांवों में पहली बार स्वतंत्रता दिवस पर सार्वजनिक रूप से तिरंगा फहराना इसी बदलाव का प्रतीक माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि ग्रामीणों को भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करना प्राथमिकता है। तिरंगे के नीचे ग्रामीणों और जवानों का साथ मिलकर आजादी का पर्व मनाना इसी विश्वास की नई तस्वीर के रूप में सामने आया।