
जामगांव आर। जिले के पाटन थाना क्षेत्र के ग्राम कुम्हली में संयुक्त कृषि भूमि की कथित फर्जी रजिस्ट्री के मामले में पुलिस ने करीब तीन साल से फरार चल रहे दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामला खसरा नंबर 854/1 की 1.23 हेक्टेयर कृषि भूमि से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक, जमीन के वास्तविक हिस्सेदार संजय कुमार की जगह दूसरे व्यक्ति को खड़ा कर उनकी पहचान का कथित रूप से गलत इस्तेमाल करते हुए जमीन की बिक्री कराई गई। मामले में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दिलीप बंजारे (51) निवासी सिरसाकला और कन्हैया बंजारे (52) निवासी भिलाई-3 के रूप में हुई है।
2021 में हुई थी जमीन की रजिस्ट्री
पुलिस के अनुसार, ग्राम कुम्हली की जमीन संजय कुमार और उनके भाई ईश्वर दास के संयुक्त नाम पर दर्ज थी। दोनों का जमीन में बराबर हिस्सा बताया गया है। 14 जुलाई 2021 को उक्त जमीन की रजिस्ट्री कराई गई थी। शिकायतकर्ता संजय कुमार के अनुसार, रजिस्ट्री के समय वे महाराष्ट्र के नागपुर में अपनी ड्यूटी पर मौजूद थे। उन्होंने अपनी उपस्थिति साबित करने के लिए विभाग से संबंधित ड्यूटी दस्तावेज भी न्यायालय में प्रस्तुत किए थे।
असली हिस्सेदार की जगह दूसरे व्यक्ति को खड़ा करने का आरोप
शिकायत के मुताबिक, संजय कुमार की गैरमौजूदगी में उनकी जगह किसी दूसरे व्यक्ति को संजय कुमार के रूप में प्रस्तुत कर जमीन की बिक्री कराई गई। विक्रय दस्तावेज में दिलीप बंजारे को क्रेता और कन्हैया बंजारे को गवाह बनाया गया था। शिकायत में संजय कुमार ने अपने भाई ईश्वर दास समेत दिलीप बंजारे, उनकी पत्नी परागा बंजारे, कन्हैया बंजारे, मदन लाल डहरे और उप पंजीयक पाटन को पक्षकार बनाया था।
थाना, एसपी और कलेक्टर से की थी शिकायत
संजय कुमार के मुताबिक, रजिस्ट्री के बाद उन्होंने 1 सितंबर 2021 को पंजीयन कार्यालय पाटन में विक्रय विलेख पर रोक लगाने के लिए आवेदन दिया था। इसके बाद पाटन थाना, दुर्ग एसपी और कलेक्टर के समक्ष भी शिकायत की गई। जब संबंधित स्तरों पर कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने न्यायालय की शरण ली।
कोर्ट के आदेश पर 2023 में दर्ज हुई FIR
मामले में 2 फरवरी 2023 को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, पाटन ने धारा 156(3) दंड प्रक्रिया संहिता के तहत पुलिस को अपराध दर्ज कर जांच करने के निर्देश दिए। इसके बाद पाटन थाने में अपराध क्रमांक 42/2023 दर्ज किया गया। पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी और 34 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
नामांतरण को लेकर भी विवाद
शिकायत के अनुसार, रजिस्ट्री के बाद जमीन के नामांतरण के लिए भी आवेदन किया गया था। इस मामले में नायब तहसीलदार जामगांव (आर) के न्यायालय में कार्रवाई हुई और 30 मार्च 2022 को नामांतरण के प्रमाणीकरण को लेकर आदेश पारित किया गया। इस आदेश के खिलाफ अपर कलेक्टर दुर्ग के समक्ष पुनरीक्षण आवेदन भी प्रस्तुत किया गया था।
ईश्वर दास पहले गिरफ्तार, दो आरोपी थे फरार
पुलिस के मुताबिक, मामले में आरोपी ईश्वर दास को 7 जून 2026 को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जा चुका है। वहीं दिलीप बंजारे और कन्हैया बंजारे घटना के बाद से फरार बताए जा रहे थे। पुलिस ने दोनों की तलाश के लिए संभावित ठिकानों पर निगरानी रखी। इसके बाद 19 अगस्त 2026 को घेराबंदी कर दोनों को गिरफ्तार किया गया।
क्रेता और गवाह की भूमिका में थे दोनों
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार दिलीप बंजारे की भूमिका विक्रय दस्तावेज में क्रेता के तौर पर और कन्हैया बंजारे की भूमिका गवाह के रूप में सामने आई है। दोनों पर अन्य आरोपियों के साथ मिलकर वास्तविक हिस्सेदार की पहचान के कथित गलत इस्तेमाल के जरिए जमीन की बिक्री में सहयोग करने का आरोप है।
न्यायिक रिमांड पर भेजे गए
गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया। पाटन पुलिस अब कथित फर्जी पहचान, जमीन की रजिस्ट्री से जुड़े दस्तावेजों, नामांतरण प्रक्रिया और मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।