अमेरा कोयला खदान विस्तार को लेकर बवाल: पुलिस-ग्रामीणों में हिंसक झड़प, ASP सहित 26 पुलिसकर्मी और 14 ग्रामीण घायल

अमेरा कोयला खदान विस्तार को लेकर बवाल: पुलिस-ग्रामीणों में हिंसक झड़प, ASP सहित 26 पुलिसकर्मी और 14 ग्रामीण घायल

सरगुजा। सरगुजा जिले के लखनपुर थाना क्षेत्र के परसोढ़ी गांव में अमेरा कोयला खदान के विस्तार का विरोध कर रहे ग्रामीणों और पुलिस के बीच बुधवार सुबह हिंसक झड़प हो गई। पिछले 6 महीनों से चल रहा ग्रामीणों का धरना उस समय अचानक भड़क उठा जब प्रशासनिक अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ आंदोलन स्थल खाली कराने पहुंचे। सूत्रों के अनुसार, बातचीत के दौरान पुलिस द्वारा जबरन धरना स्थल हटाने की कोशिश की गई, जिससे ग्रामीण आक्रोशित हो गए और उन्होंने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। कई ग्रामीणों ने पुलिस पर गुलेल से भी हमला किया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागकर भीड़ को तितर-बितर करने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण खदान क्षेत्र में डटे रहे।

ASP, SDOP और थाना प्रभारी सहित 26 पुलिसकर्मी घायल

हिंसक झड़प में ASP अमोलक सिंह ढिल्लो,SDOP तुल सिंह,थाना प्रभारी मनीष परिहार सहित 26 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए। प्रशासन के अनुसार करीब 14 ग्रामीण भी इस संघर्ष में चोटिल हुए हैं। लगभग दो घंटे तक इलाके में तनाव की स्थिति बनी रही। फिलहाल पूरे क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। अब तक किसी भी पक्ष पर मामला दर्ज नहीं हुआ है।

जंगल बचाओ आंदोलन: 15 साल से संघर्ष जारी

सरगुजा में कोल माइंस विस्तार, वन कटाई और भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आदिवासी लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। उदयपुर और आसपास के क्षेत्रों में लगभग 15 साल से ‘जंगल बचाओ आंदोलन’ चल रहा है।
अमेरा खदान विस्तार का विरोध भी इसी आंदोलन का हिस्सा है।

मुआवजा दिया गया, फिर भी ग्रामीण जमीन छोड़ने को तैयार नहीं

एसईसीएल प्रबंधन का कहना है कि परसोढ़ी कला गांव में खदान विस्तार के लिए ग्रामीणों को मुआवजा दिया गया है।
जीएम संजय सिंह के मुताबिक कई ग्रामीण मुआवजा राशि ले चुके हैं, लेकिन आंदोलनकारी अभी भी भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रहे हैं।

235 प्रभावित, सिर्फ 16 ने लिया मुआवजा

एसईसीएल के अनुसार—खदान विस्तार से 235 ग्रामीण प्रभावित हैं। अब तक सिर्फ 16 लोगों ने मुआवजा स्वीकार किया है।बाकी ग्रामीणों का कहना है कि वे न मुआवजा लेंगे, न नौकरी, और अपनी जमीन हर हाल में बचाएंगे। परसोढ़ी और आसपास के गांवों में तनाव बरकरार है। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है, जबकि ग्रामीणों ने आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है।

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