दुर्ग, छत्तीसगढ़ राज्य सरकार ने एक बड़ी पहल करते हुए पूरे प्रदेश में वेटलैंड्स (आर्द्रभूमि) के संरक्षण के लिए “वेटलैंड मित्र” बनाए जाने की घोषणा की है। यह योजना प्रदेश के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लागू की जाएगी। वेटलैंड मित्र न सिर्फ इन क्षेत्रों की नियमित निगरानी करेंगे, बल्कि उसकी साफ-सफाई, अतिक्रमण से सुरक्षा और जन-जागरूकता का भी काम करेंगे।
क्या होते हैं वेटलैंड्स?
तालाब, सिंचाई टैंक, नदियों से जुड़े किनारे या ऐसी ज़मीन जहां लंबे समय तक पानी जमा रहता है, उन्हें वेटलैंड्स कहा जाता है। यहां मौजूद पानी वर्षा के समय स्थायी रूप से या अस्थायी रूप से ठहरता है, जिससे मिट्टी नम रहती है और यह इलाका प्राकृतिक रूप से बाढ़ नियंत्रण, जल शुद्धि और जलस्तर बनाए रखने में सहायक होता है। वेटलैंड्स वन्य जीवों, पक्षियों और मछलियों का महत्वपूर्ण आवास स्थल भी होते हैं।
अहिवारा में होगी शुरुआत, प्रदेशभर में होगा विस्तार
दुर्ग जिले के अहिवारा नगर पालिका क्षेत्र में इसकी शुरुआत की जा रही है। नगर पालिका सीएमओ अंकुर पांडे ने बताया कि स्थानीय नागरिकों को वेटलैंड मित्र बनने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। एक टीम का गठन कर जल्द ही इन मित्रों को वेटलैंड्स की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
90% वेटलैंड्स गैर-वन क्षेत्र में, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में संरक्षण कार्य
वन विभाग के मुताबिक प्रदेश में कुल 654 वेटलैंड्स को चिन्हित कर लिया गया है। इनकी मैपिंग पूरी हो चुकी है और अतिक्रमण की जानकारी भी एकत्र कर ली गई है। अफसरों के अनुसार, लगभग 90% वेटलैंड्स गैर-वन क्षेत्रों में हैं, जो अधिक खतरे में हैं। सुप्रीम कोर्ट में भी वेटलैंड्स संरक्षण को लेकर सुनवाई चल रही है, जिससे इन स्थलों को कानूनी सुरक्षा का भी सहारा मिलेगा।
वेटलैंड्स को सबसे बड़ा खतरा: गंदगी और अतिक्रमण
शहरी क्षेत्रों में तालाबों और जलाशयों के किनारे अक्सर असामाजिक तत्वों और नशाखोरी के कारण गंदगी फैलती है। डिस्पोजल सामग्री, प्लास्टिक और घरेलू कचरा वेटलैंड्स को प्रदूषित कर रहे हैं। कई जगहों पर अतिक्रमण ने जलधारण क्षेत्र को संकुचित कर दिया है। वेटलैंड मित्रों को इन समस्याओं की निगरानी और समाधान के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाएगा।
प्रशासन की प्रतिक्रिया:
दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने बताया कि राज्य सरकार के निर्देश पर सभी जिलों में वेटलैंड्स चिन्हित कर लिए गए हैं। सभी इकाइयों को वेटलैंड मित्र बनाने और उन्हें जिम्मेदारी सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। इससे न केवल पर्यावरण की रक्षा होगी, बल्कि जल स्तर में भी बढ़ोतरी होगी।
निष्कर्ष:
छत्तीसगढ़ सरकार की यह पहल न केवल जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने में मदद करेगी, बल्कि राज्य के पारंपरिक जल स्रोतों के पुनर्जीवन में भी अहम भूमिका निभाएगी। जनता की भागीदारी के साथ यह अभियान एक मॉडल बन सकता है, जिसे अन्य राज्य भी अपना सकते हैं।