अकतई में सरकारी स्कूल का हाल बेहाल, बारिश में सीपेज और छत का प्लास्टर गिरने से पहली से पांचवीं तक के बच्चों की कक्षाएं प्रभावित! सरपंच माधुरी ने कहा- “क्या प्रशासन किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है?

अकतई में सरकारी स्कूल का हाल बेहाल, बारिश में सीपेज और छत का प्लास्टर गिरने से पहली से पांचवीं तक के बच्चों की कक्षाएं प्रभावित! सरपंच माधुरी ने कहा- “क्या प्रशासन किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है?

जामगांव आर। प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री के गृहजिले में सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आए दिन स्कूल भवनों का प्लास्टर गिरने, बुनियादी सुविधाओं की कमी और पालकों के आक्रोश की खबरें सामने आ रही हैं। ताजा मामला ग्राम पंचायत अकतई में संचालित शासकीय प्राथमिक शाला का है, जहां जर्जर भवन और बारिश के दौरान होने वाले सीपेज के कारण पहली से पांचवीं तक के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। स्कूल भवन के कई कमरों की हालत इतनी खराब है कि छत का प्लास्टर उखड़कर गिर रहा है और बारिश के दौरान कमरों में सीपेज हो रहा है। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें इन जर्जर कक्षों में बैठाना जोखिम भरा हो गया है। ग्राम पंचायत की सरपंच माधुरी नरोत्तम निषाद ने स्कूल भवन की स्थिति को देखते हुए शाला प्रबंधन को जर्जर कक्षों में बच्चों को नहीं बैठाने की हिदायत दी है। उनका कहना है कि वे पिछले करीब एक साल से जिला कलेक्टर और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को स्कूल भवन की समस्या से अवगत कराकर नए कक्षों के निर्माण की मांग कर रही हैं, लेकिन अब तक जिम्मेदार विभाग की ओर से ठोस पहल नहीं हुई है। सरपंच ने नाराजगी जताते हुए कहा कि “शायद प्रशासन के जिम्मेदार किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि यदि जर्जर छत का कोई हिस्सा बच्चों के ऊपर गिर गया तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी। अब सवाल यह है कि एक साल से शिकायतों के बावजूद यदि जर्जर स्कूल भवन की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ, तो आखिर बच्चों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार विभाग कब गंभीर होगा? बारिश के बीच वैकल्पिक स्थानों पर पढ़ने को मजबूर नौनिहालों के लिए नए कक्ष निर्माण की मांग अब जोर पकड़ती दिखाई दे रही है।

• कक्षाओं के बजाय बरामदे और प्रधानपाठक कक्ष में पढ़ाई

विद्यालय के प्रधानपाठक तरुण पाटिल ने बताया कि भवन की खराब स्थिति को देखते हुए फिलहाल सुरक्षा की दृष्टि से बच्चों को जर्जर कमरों में नहीं बैठाया जा रहा है। पहली से पांचवीं तक के विद्यार्थियों को प्रधानपाठक कक्ष और बरामदे में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है।.इस वैकल्पिक व्यवस्था के चलते बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने के साथ-साथ शिक्षकों के सामने भी कक्ष संचालन की समस्या बनी हुई है।

• बीईओ बोले- उच्च कार्यालय को पहले ही दी गई थी जानकारी

मामले में ब्लॉक शिक्षा अधिकारी डालेंद्र देवांगन ने बताया कि विद्यालय के भवन और कक्षाओं की खराब स्थिति से पूर्व में ही उच्च कार्यालय को अवगत करा दिया गया था। वर्तमान में भवन को तत्काल नई स्वीकृति तथा मरम्मत, दोनों कार्यों के लिए वीबी जीरामजी के तहत आज ही भेजा जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि पुरे ब्लॉक से ऐसे स्कूलों की प्राथमिकता के आधार पर सूची बनाकर भेज रहे हैं उन्होंने उम्मीद जताई कि जल्द ही स्कूल भवन की समस्या का समाधान हो जाएगा।

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