
( गौठान-कांजी हाउस बंद, पंचायतों के पास फंड नहीं; बाहर से छोड़े जा रहे मवेशियों पर रोक लगाने ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार )
जामगांव-आर। पाटन ब्लॉक के ग्रामीण अंचल में आवारा मवेशियों की समस्या किसानों के लिए लगातार परेशानी का कारण बनी हुई है। खेतों में खड़ी धान की फसल को मवेशियों से बचाने के लिए कई गांवों में किसान अपना जरूरी काम छोड़कर दिन-रात फसल की रखवाली करने को मजबूर हैं। स्थानीय स्तर पर मवेशियों के उचित प्रबंधन की व्यवस्था नहीं होने और पंचायतों के पास पर्याप्त फंड नहीं होने से समस्या और गंभीर हो गई है।दक्षिण पाटन के ग्राम नवागांव बी में ग्रामीणों ने इस समस्या से निपटने के लिए स्वयं पहल करते हुए पिछले करीब 15 दिनों से ग्रामीण व्यवस्था के तहत फसल की रखवाली शुरू की है। प्रतिदिन करीब 10 ग्रामीण सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक खेतों में ड्यूटी लगाकर खड़ी धान की फसल की निगरानी कर रहे हैं। इस तरह रोजाना करीब 12 घंटे ग्रामीणों को खेतों की रखवाली करनी पड़ रही है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव के बाहर से लाए गए आवारा मवेशियों को हर दो-तीन दिन में रात के समय कोई अज्ञात व्यक्ति टेमरी रोड स्थित नर्सरी क्षेत्र अथवा गातापार रोड स्थित हेलीपैड के पास छोड़कर चला जाता है। सुबह होते ही ये मवेशी आसपास के खेतों में पहुंच जाते हैं और किसानों की खड़ी फसल को नुकसान पहुंचाते हैं।
• स्थानीय मवेशियों की व्यवस्था, बाहरी मवेशी बने चुनौती-
ग्रामीणों का कहना है कि गांव के पालतू मवेशियों के चराने के लिए स्थानीय ग्रामीण व्यवस्था के साथ यादव समाज के लोगों का भी सहयोग लिया जाता है। इससे गांव के मवेशियों को लेकर एक व्यवस्था बनी हुई है, लेकिन बाहर से लगातार छोड़े जा रहे आवारा मवेशियों को लेकर ग्रामीणों के सामने बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि इन मवेशियों के प्रबंधन और इन्हें गांवों में छोड़ने वालों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? ग्राम प्रमुख महेश साहू ने ग्रामीण व्यवस्था के तहत फसल की रखवाली में जुटे सभी ग्रामीणों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ प्रतिदिन अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। किसानों की मेहनत से तैयार हो रही फसल को बचाने के लिए ग्रामीणों का यह प्रयास सराहनीय है।
• 112 को सूचना, गौशालाओं से संपर्क फिर भी नहीं मिला समाधान–
कृषक महेश साहू ने आवारा मवेशियों की समस्या की जानकारी 112 पेट्रोलिंग वाहन को भी देकर आवश्यक कार्रवाई और ध्यान देने का आग्रह किया है। उन्होंने बालोद जिले में संचालित कई गौशालाओं से भी संपर्क किया, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार वहां मवेशियों को रखने से साफ इनकार कर दिया गया। इससे ग्रामीणों के सामने यह समस्या और गंभीर हो गई है कि आखिर पकड़े जाने या गांव में छोड़े जाने वाले मवेशियों को रखा कहां जाए। ग्रामीणों का कहना है कि फसल बचाने की जिम्मेदारी वे अपनी ओर से निभा रहे हैं, लेकिन आवारा मवेशियों की समस्या का स्थायी समाधान केवल ग्रामीणों के भरोसे संभव नहीं है। इसके लिए शासन और प्रशासन को तत्काल ठोस पहल करनी होगी।
• गौठान और कांजी हाउस की व्यवस्था पर भी सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान में सरकारी स्तर पर गौठान और कांजी हाउस जैसी व्यवस्थाएं प्रभावी रूप से संचालित नहीं होने के कारण आवारा मवेशियों के प्रबंधन की समस्या बढ़ती जा रही है। पंचायत स्तर पर पर्याप्त राशि और स्पष्ट प्रशासनिक व्यवस्था के अभाव में पंचायतें भी इस मामले में खुद को असहाय महसूस कर रही हैं। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि गांवों में बाहर से छोड़े जा रहे आवारा मवेशियों पर प्रभावी रोक लगाई जाए। मवेशियों को लावारिस छोड़ने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए तथा किसानों की फसल की सुरक्षा के लिए स्थायी मवेशी प्रबंधन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।