CG में मेडिकल चमत्कार ! महिला के पेट में मिला फुटबॉल से भी बड़ा ट्यूमर, तीन विभागों की टीम ने किया हाई-रिस्क ऑपरेशन

CG में मेडिकल चमत्कार ! महिला के पेट में मिला फुटबॉल से भी बड़ा ट्यूमर, तीन विभागों की टीम ने किया हाई-रिस्क ऑपरेशन

रायपुर । लखीराम अग्रवाल स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध संत बाबा गुरु घासीदास जी स्मृति चिकित्सालय, रायगढ़ में डॉक्टरों की टीम ने बेहद जटिल और जोखिम भरी सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर 46 वर्षीय महिला की जान बचाई। झलमला निवासी चंपा यादव के पेट से करीब 8 किलोग्राम वजनी और फुटबॉल के आकार का विशालकाय ट्यूमर (फाइब्रॉएड) निकाला गया। ट्यूमर का आकार लगभग 24.2 × 23.1 × 17 सेंटीमीटर था। महिला पिछले एक महीने से पेट में तेज दर्द, अत्यधिक सूजन और उल्टी जैसी गंभीर समस्याओं से परेशान थीं। 22 अगस्त 2026 को उन्हें आपातकालीन स्थिति में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में भर्ती कराया गया।

जांच के दौरान महिला का हीमोग्लोबिन महज 7.5 ग्राम/डेसीलीटर पाया गया। सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड में सामने आया कि विशालकाय गांठ के दबाव से गर्भाशय विस्थापित हो गया था। इसके अलावा बायीं मूत्रवाहिनी पर दबाव पड़ने से किडनी प्रभावित हो रही थी, जबकि लिवर के पैरामीटर भी बिगड़े हुए थे। मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने तत्काल ऑपरेशन करने के बजाय पहले उनकी स्थिति स्थिर की। खून की कमी दूर करने के लिए कई यूनिट पैक्ड रेड ब्लड सेल चढ़ाए गए और संक्रमण से बचाव तथा ऑर्गन फंक्शन को सर्जरी के अनुकूल बनाने के लिए आवश्यक एंटीबायोटिक्स एवं उपचार दिया गया।

मरीज के स्थिर होने के बाद 1 सितंबर 2026 को जनरल एनेस्थीसिया में हाई-रिस्क एक्सप्लोरेटरी लेपरोटॉमी की गई। ऑपरेशन के दौरान सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि विशाल ट्यूमर आंतों से गहराई से चिपका हुआ था। स्थिति की जटिलता को देखते हुए जनरल सर्जरी यूनिट की विशेष सहायता ली गई। स्त्री रोग, जनरल सर्जरी और निश्चेतना विभाग की संयुक्त टीम ने बेहद सावधानी से आंतों के जटिल जुड़ाव को अलग किया। साथ ही दोनों मूत्रवाहिनियों को सुरक्षित रखते हुए ट्यूमर को अलग किया गया। इसके बाद गर्भाशय सहित विशालकाय ट्यूमर को सफलतापूर्वक शरीर से बाहर निकाला गया।

जटिल और हाई-रिस्क ऑपरेशन के बावजूद सर्जरी सफल रही। ऑपरेशन के बाद चंपा यादव को रिकवरी रूम में रखा गया, जहां उन्हें आईवी फ्लूइड्स और दर्द निवारक दवाएं दी जा रही हैं। चिकित्सकों के अनुसार उनकी स्थिति अब स्थिर है और वे स्वास्थ्य लाभ ले रही हैं। इस सफल ऑपरेशन ने एक बार फिर यह दिखाया कि गंभीर और जटिल मामलों में विभिन्न चिकित्सा विभागों के बीच बेहतर समन्वय से मरीजों को समय पर प्रभावी उपचार उपलब्ध कराया जा सकता है।

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