रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित 570 करोड़ रुपए के कोल लेवी घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) सोमवार, 5 अक्टूबर को विशेष न्यायालय में अंतरिम आरोप-पत्र पेश करेगी। मामले में कांग्रेस नेताओं और अधिकारियों समेत 9 आरोपियों को कोर्ट में पेश होने के लिए समन जारी किया गया है। जिन आरोपियों को कोर्ट ने तलब किया है, उनमें कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव, पूर्व विधायक चंद्रदेव राय, कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल, IAS जयप्रकाश मौर्य, दीपेश टांक समेत 9 आरोपी शामिल हैं। सभी को 5 अक्टूबर को विशेष न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। EOW की ओर से FIR में नामजद आरोपियों के खिलाफ जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आरोप-पत्र प्रस्तुत किया जाएगा।
जांच में नेताओं-अफसरों तक रकम पहुंचने का दावा
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच और चार्जशीट में कथित कोल लेवी की रकम नेताओं और अधिकारियों तक पहुंचने तथा उससे संपत्ति, चुनावी खर्च, वाहन और आभूषण खरीदने के दावे किए गए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक कारोबारी सूर्यकांत तिवारी इस कथित सिंडिकेट में रकम के लेन-देन में प्रमुख भूमिका में था। ED के अनुसार, सूर्यकांत तिवारी की डायरी और अन्य दस्तावेजों में करोड़ों रुपए के लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड मिले हैं। जांच में यह भी दावा किया गया कि रकम अलग-अलग माध्यमों से नेताओं और अधिकारियों तक पहुंचाई गई।
देवेंद्र यादव पर 3 करोड़ लेने और चुनाव में खर्च का आरोप
ED की चार्जशीट के मुताबिक विधायक देवेंद्र यादव को कथित तौर पर 11 बार में करीब 3 करोड़ रुपए मिले। जांच एजेंसी का दावा है कि इस रकम का इस्तेमाल खैरागढ़ उपचुनाव और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से जुड़े खर्चों में किया गया। जांच के दौरान देवेंद्र यादव और सूर्यकांत तिवारी के बीच हुई कथित WhatsApp बातचीत को भी साक्ष्य के तौर पर शामिल किए जाने की बात कही गई है। चैट में रायपुर में मुलाकात और खैरागढ़ जाने से संबंधित बातचीत का उल्लेख है।
चंद्रदेव राय पर 46 लाख लेने का आरोप
ED की जांच के मुताबिक पूर्व विधायक चंद्रदेव प्रसाद राय ने सूर्यकांत तिवारी से कथित तौर पर 46 लाख रुपए लिए। एजेंसी के अनुसार इसमें से बड़ी राशि उत्तर प्रदेश चुनाव में खर्च की गई, जबकि करीब 4 लाख रुपए से रायपुर की एक ज्वेलरी दुकान से सोने का हार खरीदा गया। जांच एजेंसी ने चंद्रदेव राय और सूर्यकांत तिवारी के बीच कथित WhatsApp बातचीत का भी उल्लेख किया है। इसमें ज्वेलरी दुकान और करीब 60 ग्राम के सोने के हार की खरीद से संबंधित बातचीत होने का दावा किया गया है।
विनोद तिवारी और RP सिंह पर भी आरोप
ED के मुताबिक कांग्रेस नेता विनोद तिवारी ने कथित तौर पर 19 किश्तों में करीब 1.87 करोड़ रुपए लिए। एजेंसी का दावा है कि इस रकम का इस्तेमाल खैरागढ़ चुनाव और संपत्ति खरीदने में किया गया। वहीं कांग्रेस नेता RP सिंह पर करीब 2.01 करोड़ रुपए लेने का आरोप है। ED के अनुसार पूछताछ के दौरान सिंह ने रकम के इस्तेमाल को लेकर जानकारी दी थी। एजेंसी का दावा है कि इस रकम का इस्तेमाल पार्टी के लिए वाहनों और मीडिया प्रबंधन में किया गया।
सौम्या चौरसिया और रानू साहू पर भी गंभीर आरोप
ED की चार्जशीट में तत्कालीन मुख्यमंत्री सचिवालय से जुड़ी रहीं सौम्या चौरसिया और निलंबित IAS रानू साहू के खिलाफ भी करोड़ों रुपए लेने के आरोप लगाए गए हैं।
जांच एजेंसी के मुताबिक सौम्या चौरसिया को कथित तौर पर 31 करोड़ रुपए, जबकि रानू साहू को करीब 5.52 करोड़ रुपए दिए गए। ED ने आरोप लगाया है कि इस रकम से संपत्तियां खरीदी गईं। जांच में सौम्या चौरसिया की मां के नाम पर कई संपत्तियों और रानू साहू के भाई समेत अन्य रिश्तेदारों के नाम पर संपत्ति खरीदे जाने का भी दावा किया गया है।
570 करोड़ की कथित अवैध वसूली का मामला
ED के मुताबिक छत्तीसगढ़ में कोयले के परिवहन से जुड़ी व्यवस्था में कथित तौर पर अवैध वसूली की गई। एजेंसी का दावा है कि कोल वॉशरी संचालकों और कोयला कारोबारियों से प्रति टन के हिसाब से रकम वसूली जाती थी। जांच एजेंसी के अनुसार कोयला परिवहन के ऑनलाइन परमिट को ऑफलाइन करने की व्यवस्था के जरिए वसूली का रास्ता बनाया गया। इस संबंध में खनिज विभाग के तत्कालीन संचालक IAS समीर विश्नोई के 15 जुलाई 2020 के आदेश का भी जांच में उल्लेख किया गया है।
36 आरोपियों के खिलाफ FIR
ED की जांच के आधार पर ACB/EOW ने मामले में पूर्व मंत्रियों, विधायकों, अधिकारियों और कारोबारियों समेत 36 लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की है। मामले में IAS रानू साहू, IAS समीर विश्नोई, सौम्या चौरसिया, JD माइनिंग एसएस नाग और कारोबारी सूर्यकांत तिवारी समेत कई लोगों की गिरफ्तारी पहले हो चुकी है। अब 5 अक्टूबर को होने वाली सुनवाई में EOW द्वारा पेश किए जाने वाले आरोप-पत्र और जांच में जुटाए गए साक्ष्यों पर कोर्ट की कार्यवाही आगे बढ़ेगी।
नोट: इस मामले में लगाए गए आरोप जांच एजेंसियों के दावों और आरोप-पत्र में बताए गए तथ्यों पर आधारित हैं। आरोपों की न्यायिक पुष्टि होना अभी बाकी है।