
रायपुर/धमतरी। छत्तीसगढ़ में भारी बारिश का दौर फिलहाल थमता नजर आ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। हालांकि पिछले 24 घंटे में दक्षिण छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में भारी से अतिभारी बारिश दर्ज की गई। धनोरा में सर्वाधिक 140 मिमी, जबकि बस्तर में 100 मिमी बारिश हुई। पखांजूर, नांगुर, कोंडागांव और अंतागढ़ में करीब 90-90 मिमी पानी बरसा। प्रदेश में मानसून को दस्तक दिए 82 दिन हो चुके हैं। 23 जून को दंतेवाड़ा के रास्ते प्रदेश में प्रवेश करने के बाद मानसून ने अब तक अच्छी बारिश कराई है। 12 सितंबर तक प्रदेश में 1001 मिमी बारिश दर्ज की जा चुकी है। यह इस अवधि के औसत 1041.1 मिमी से करीब 4 फीसदी कम है। लगातार हुई बारिश का असर प्रदेश के जलाशयों के जलस्तर पर भी दिखाई दे रहा है। 46 प्रमुख और मध्यम जलाशयों में औसत जलभराव 91.10 फीसदी पहुंच गया है। इनमें 7 जलाशय पूरी तरह भर चुके हैं, जबकि 18 अन्य जलाशयों में 90 फीसदी से ज्यादा पानी है। जलस्तर बढ़ने के कारण धमतरी के रविशंकर सागर यानी गंगरेल समेत कई जलाशयों के गेट खोलकर पानी छोड़ा गया है।
रायपुर में बादल छाए रहने और बारिश के आसार
13 सितंबर को प्रदेश के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। राजधानी रायपुर में आसमान सामान्यतः बादलों से घिरा रह सकता है। शहर में बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने के आसार हैं।
महानदी उफान पर, गंगरेल के छह गेट खोले
धमतरी जिले में लगातार बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित हुआ है। महानदी उफान पर है और गंगरेल बांध से पानी छोड़ा जा रहा है। जल संसाधन विभाग के मुताबिक शनिवार शाम 7 बजे की स्थिति में गंगरेल बांध के 6 गेट खोलकर 33 हजार क्यूसेक पानी महानदी में छोड़ा जा रहा था। कैचमेंट एरिया से भी करीब इतनी ही मात्रा में पानी की लगातार आवक बनी हुई थी। इससे पहले 11 सितंबर की आधी रात को गंगरेल के 9 गेट खोलकर रिकॉर्ड 53 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। लगातार पानी छोड़े जाने से महानदी के जलस्तर में बढ़ोतरी हुई है।
राजिम के त्रिवेणी संगम में भी उफान
महानदी में बढ़े जलप्रवाह का असर राजिम के त्रिवेणी संगम पर भी दिखाई दे रहा है। यहां नदी का जलस्तर बढ़ने से उफान की स्थिति बनी हुई है। वहीं कोपरा एनीकट के पास एक युवक के बह जाने की घटना भी सामने आई है। लगातार बारिश और जलाशयों से पानी छोड़े जाने के कारण नदी-नालों के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।