नेशनल लोक अदालत में हिंदू-मुस्लिम विवाद से लेकर पिता-पुत्र के संपत्ति विवाद तक सुलझे,कोर्ट में पेंडिंग 14.97 लाख से ज्यादा मामलों का निराकरण

नेशनल लोक अदालत में हिंदू-मुस्लिम विवाद से लेकर पिता-पुत्र के संपत्ति विवाद तक सुलझे,कोर्ट में पेंडिंग 14.97 लाख से ज्यादा मामलों का निराकरण

रायपुर। वर्ष 2026 की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन शनिवार को रायपुर में किया गया। लोक अदालत में न्यायालयों में लंबित मामलों के साथ प्री-लिटिगेशन और आपसी सहमति से सुलझाए जा सकने वाले विवादों का भी निराकरण किया गया। देशभर में आयोजित लोक अदालत के तहत कुल 14 लाख 97 हजार 744 मामलों का निराकरण हुआ, जबकि पक्षकारों को 103 करोड़ 13 लाख 61 हजार 484 रुपए का लाभ मिला। रायपुर में आयोजित लोक अदालत में करीब 27 हजार 296 लंबित मामलों का निराकरण किया गया। इनमें पारिवारिक, आपराधिक, सिविल, राजस्व, पेंशन, जनोपयोगी सेवाओं और ट्रैफिक चालान से जुड़े मामले शामिल रहे।

हिंदू-मुस्लिम विवाद में मानवता का संदेश

न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी प्रज्ञा सिंह की अदालत में दो पक्षों के बीच धार्मिक विवाद से जुड़ा मामला चल रहा था। दोनों पक्षों के बीच विवाद के कारण समझौता नहीं हो पा रहा था। अदालत ने दोनों पक्षों को समझाइश देते हुए कहा कि सभी धर्म समान हैं और मानवता से बड़ा कोई धर्म नहीं है। समझाइश के बाद दोनों पक्ष आपसी राजीनामे के लिए तैयार हो गए। उन्होंने विवाद समाप्त करते हुए समझौता किया और खुशी-खुशी अपने घर लौट गए।

पिता-पुत्र के बीच पांच साल पुराना संपत्ति विवाद खत्म

सप्तम व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी अमिता कोशिमा रावटे की अदालत में पिता और बेटे के बीच वर्ष 2021 से पैतृक संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा था। पिता द्वारा पैतृक संपत्ति बेचने के बाद बेटे ने अपने हिस्से की जमीन को लेकर न्यायालय में मामला दायर किया था। लोक अदालत में दोनों पक्षों को आपसी सहमति से विवाद खत्म करने के लिए समझाया गया। इसके बाद पिता और बेटे ने समझौता कर लिया। मामला खत्म होने के साथ ही दोनों के बीच रिश्तों में भी फिर से मधुरता लौट आई।

पति-पत्नी ने भी खत्म किया तलाक का मामला

तृतीय अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय आनंद कुमार ध्रुव की समझाइश के बाद पति-पत्नी ने भी अपना विवाद समाप्त कर लिया। पत्नी ने पति के खिलाफ तलाक की याचिका दायर की थी। न्यायालय की समझाइश के बाद दोनों साथ रहने के लिए राजी हो गए और आपसी समझौते के आधार पर मामला खत्म कर दिया गया। इसके बाद दोनों साथ अपने घर लौट गए।

पहली बार मोहल्ला लोक अदालत का आयोजन

छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के नए संकल्प के तहत इस बार मोहल्ला लोक अदालत का भी आयोजन किया गया। नगर निगम व्हाइट हाउस में स्थायी लोक अदालत के सभापति एवं अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शांतनु कुमार देशलहरे ने मामलों की सुनवाई की। जोन उपायुक्त रश्मि और जोन कमिश्नर दिव्या चंद्राकर की मौजूदगी में जनोपयोगी सेवाओं से जुड़े 65 मामलों का मौके पर ही निराकरण किया गया। इसके अलावा जनोपयोगी सेवाओं से जुड़े कुल 238 मामलों और कमर्शियल कोर्ट के एक मामले का भी निराकरण हुआ।

ऑनलाइन और वीडियो के जरिए भी समझौते

राष्ट्रीय लोक अदालत इस बार हाइब्रिड तरीके से आयोजित की गई। पक्षकारों को न्यायालय में उपस्थित होकर समझौता करने के साथ ही ऑनलाइन और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भी राजीनामा करने की सुविधा मिली। इससे दूर रहने वाले पक्षकारों के लिए भी विवादों का समाधान आसान हुआ।

दिव्यांगजनों और श्रमिकों को मिली सहायता

समाज कल्याण विभाग के सहयोग से जरूरतमंदों को 8 श्रवण यंत्र और 2 ट्राइसाइकिल वितरित की गईं। वहीं श्रम विभाग के सहयोग से असंगठित क्षेत्र के कामगारों को 10 श्रमिक कार्ड प्रदान किए गए। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश बलराम प्रसाद वर्मा ने बैंकों और विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉल का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को अधिक से अधिक मामलों को आपसी समझौते के जरिए सुलझाने के निर्देश दिए।

दूर-दराज से आए पक्षकारों के लिए मुफ्त भोजन

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण रायपुर और गुरुद्वारा धन-धन बाबा साहिब जी, तेलीबांधा के संयुक्त सहयोग से लोक अदालत में आने वाले पक्षकारों के लिए मुफ्त भोजन की व्यवस्था की गई। दूर-दराज और सैकड़ों किलोमीटर से आए लोगों को भोजन उपलब्ध कराया गया। भोजन की व्यवस्था से पक्षकारों को राहत मिली और उनके चेहरों पर संतोष नजर आया।

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