
रायपुर। झीरम घाटी मामले में NIA की विशेष अदालत के फैसले के बाद सर्व आदिवासी समाज ने मामले से जुड़े व्यापक पहलुओं की दोबारा जांच की मांग की है। समाज ने कहा है कि वह अदालत के फैसले से जुड़े दस्तावेजों का अध्ययन कर हाईकोर्ट में अपील करेगा। जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई जारी रखने की बात भी कही गई है। NIA की विशेष अदालत ने 16 सितंबर 2026 को झीरम घाटी हमले के मामले में दोषी ठहराए गए 10 आरोपियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। इससे पहले 5 सितंबर को अदालत ने सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था।
छह जिलों के प्रतिनिधियों और परिजनों की बैठक
शुक्रवार को परपा स्थित कोया समाज भवन में बस्तर संभाग के छह जिलों के प्रतिनिधियों और मामले में सजा पाए आरोपियों के परिजनों की करीब तीन घंटे बैठक हुई। बैठक में झीरम मामले की जांच, NIA कोर्ट का फैसला, आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों को मिलने वाले पुनर्वास लाभ समेत विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। समाज के पदाधिकारियों के मुताबिक, बैठक में दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, कोंडागांव और बस्तर समेत संभाग के विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
कानूनी लड़ाई के लिए हर आदिवासी परिवार से ₹20 सहयोग
सर्व आदिवासी समाज ने हाईकोर्ट में अपील की तैयारी के लिए आर्थिक सहयोग जुटाने का निर्णय लिया है। इसके तहत बस्तर संभाग के प्रत्येक आदिवासी परिवार से ₹20-₹20 सहयोग लेने की बात कही गई है। समाज के अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर के मुताबिक, बैठक में शामिल 10 आरोपियों के परिजनों ने दावा किया कि उनके परिवार के सदस्य झीरम की घटना में शामिल नहीं थे और उन्हें मामले में गलत तरीके से आरोपी बनाया गया।
पूरी साजिश की जांच की मांग
समाज ने कहा कि अदालत द्वारा दोषी ठहराए गए लोगों के संबंध में न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान किया जाएगा, लेकिन संगठन झीरम घाटी घटना के पीछे की कथित व्यापक साजिश और उससे जुड़े सभी पहलुओं की जांच चाहता है। पदाधिकारियों ने प्रभावशाली लोगों की कथित भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना उद्देश्य नहीं है, बल्कि उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर घटना से जुड़े सभी सवालों का समाधान होना चाहिए।
आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास लाभों के ऑडिट की मांग
बैठक में आत्मसमर्पण कर चुके कुछ नक्सलियों को मिले आर्थिक सहायता और पुनर्वास लाभों का मुद्दा भी उठाया गया। समाज ने ऐसे मामलों में साक्ष्य-आधारित और पारदर्शी ऑडिट की मांग की है। संगठन का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति की झीरम मामले से संबंधित भूमिका के विश्वसनीय साक्ष्य सामने आते हैं, तो उसकी भूमिका की कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच की जानी चाहिए।
जेलों में बंद आदिवासियों के मामले उठाने का फैसला
बैठक में कथित तौर पर निर्दोष आदिवासियों के जेल में बंद होने के मामलों की जानकारी जुटाने और उनके लिए प्रतिनिधिमंडल भेजने का निर्णय भी लिया गया। समाज ने झीरम मामले से जुड़े दस्तावेजों, कथित आरोपियों के बयानों और अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों का अध्ययन करने की बात कही है।
कांग्रेस की आज अहम बैठक
झीरम मामले को लेकर प्रदेश कांग्रेस की भी शनिवार को रायपुर स्थित राजीव भवन में बैठक प्रस्तावित है। बैठक की अध्यक्षता प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज करेंगे। इसमें नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव, ताम्रध्वज साहू, प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गेंदु के अलावा झीरम शहीदों के परिजन, घायल और विधि विशेषज्ञ शामिल होंगे। बैठक में NIA कोर्ट के हालिया फैसले के बाद उपलब्ध कानूनी विकल्पों और आगे की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है। NIA अदालत के फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील की बात बचाव पक्ष की ओर से भी पहले कही गई थी।
25 मई 2013 को हुआ था हमला
25 मई 2013 को दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर माओवादी हमला हुआ था। इस घटना में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं समेत 29 लोगों की मौत हुई थी। मामले की जांच NIA ने की और जगदलपुर की विशेष अदालत में लंबे समय तक सुनवाई चली। अदालत ने 5 सितंबर 2026 को 10 आरोपियों को दोषी ठहराया और 16 सितंबर को उन्हें मृत्युदंड की सजा सुनाई।