ढेबर के गोदाम से सरकारी दुकानों तक पहुंचती थी डुप्लीकेट शराब! नोएडा-रायपुर में छपते थे फर्जी होलोग्राम, GST ऑफिस में भी रखने का आरोप

ढेबर के गोदाम से सरकारी दुकानों तक पहुंचती थी डुप्लीकेट शराब! नोएडा-रायपुर में छपते थे फर्जी होलोग्राम, GST ऑफिस में भी रखने का आरोप

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो एवं एंटी करप्शन ब्यूरो (EOW-ACB) ने बड़ा खुलासा करते हुए 42 आरोपियों के खिलाफ करीब 27 हजार पन्नों का 10वां पूरक आरोप पत्र पेश किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, कथित घोटाले में अवैध शराब के उत्पादन और बिक्री से लेकर कमीशन वसूली, नकदी के लेन-देन और हवाला के जरिए रकम दुबई पहुंचाने तक का नेटवर्क काम कर रहा था। आरोप पत्र में 20 व्यक्तियों और 22 कंपनियों को आरोपी बनाया गया है। इनमें यश टुटेजा, अख्तर ढेबर, प्रिंस भाटिया, नवीन केडिया, विधु गुप्ता और आबकारी अधिकारी आशीष श्रीवास्तव सहित कारोबारी और कंपनियां शामिल हैं। EOW-ACB की जांच के अनुसार, कथित घोटाले में वैध शराब की सप्लाई पर कमीशन वसूली के अलावा ‘पार्ट-B’ के नाम से बिना आबकारी शुल्क चुकाए शराब तैयार करने और बेचने की अलग व्यवस्था बनाई गई थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस शराब को डुप्लीकेट होलोग्राम लगाकर सरकारी शराब दुकानों तक पहुंचाया जाता था, जबकि बिक्री का पूरा हिसाब सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होता था।

ढेबर के गोदाम से दुकानों तक सप्लाई का आरोप

जांच दस्तावेजों के मुताबिक, अनवर ढेबर से जुड़े धनेली स्थित गोदाम में डुप्लीकेट होलोग्राम वाली शराब पहुंचाई जाती थी। वहां से कथित तौर पर इसे अलग-अलग सरकारी शराब दुकानों तक सप्लाई किया जाता था। एजेंसी का दावा है कि इस नेटवर्क में अतिरिक्त बोतलों, डुप्लीकेट होलोग्राम, निजी कर्मचारियों और चुनिंदा परिवहन वाहनों का इस्तेमाल किया जाता था। शराब की बॉटलिंग, पैकिंग और परिवहन की प्रक्रिया इस तरह संचालित किए जाने का आरोप है कि अवैध शराब सरकारी सप्लाई की वैध शराब जैसी दिखाई दे। जांच में यह भी आरोप लगाया गया है कि शराब की बिक्री से मिलने वाली रकम का पूरा हिसाब सरकारी खातों में जमा नहीं किया जाता था। इससे आबकारी शुल्क की चोरी और राज्य सरकार को राजस्व नुकसान होने की बात कही गई है।

नोएडा और रायपुर में छपते थे डुप्लीकेट होलोग्राम

EOW-ACB के जांच दस्तावेजों के अनुसार, कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए डुप्लीकेट होलोग्राम की छपाई के लिए नोएडा और रायपुर स्थित कार्यालयों का इस्तेमाल किया जाता था। जांच में प्रिज्म होलोग्राफी एंड सिक्योरिटी फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड के विधु गुप्ता की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि डुप्लीकेट होलोग्राम को संबंधित नेटवर्क के जरिए डिस्टिलरियों तक पहुंचाया जाता था और फिर उन्हें पार्ट-B शराब की बोतलों पर लगाया जाता था। इससे बिना आबकारी शुल्क चुकाई गई शराब को सरकारी सप्लाई की वैध शराब जैसा दिखाने की कथित कोशिश की जाती थी। जांच में आबकारी अधिकारी जनार्दन कौरव, कंपनी की रायपुर यूनिट के प्रभारी दिलीप पाण्डे और अन्य सहयोगियों की भूमिका की भी पड़ताल की गई। जांच एजेंसी ने यह दावा भी किया है कि डुप्लीकेट होलोग्राम को अनवर ढेबर से जुड़े गोदाम और जीएसटी कार्यालय में रखा जाता था। जरूरत के मुताबिक इन्हें डिस्टिलरियों तक पहुंचाने का आरोप है। जांच के दौरान ढेबर से जुड़ी जमीन से अधजले होलोग्राम बरामद होने की बात भी सामने आई है।

बोतलों से लेकर परिवहन तक अलग नेटवर्क बनाने का आरोप

जांच एजेंसी के मुताबिक, कथित अवैध शराब की सप्लाई के लिए खाली बोतलों की व्यवस्था भी अलग तरीके से की जाती थी। आरोप पत्र में अमित सिंह, अनुराग द्विवेदी, सत्येन्द्र गर्ग और नवनीत गुप्ता के नाम बोतलों की सप्लाई के संबंध में दर्ज किए गए हैं। आरोप है कि कुछ मामलों में बोतलें ओवर बिलिंग या बिना बिल के नकद भुगतान के जरिए उपलब्ध कराई गईं। इसके बाद डिस्टिलरी में शराब की बॉटलिंग, होलोग्राम लगाने, पैकिंग और वाहनों में लोडिंग के जरिए शराब सरकारी दुकानों तक पहुंचाई जाती थी। एजेंसी के अनुसार, पार्ट-B शराब की बिक्री से प्राप्त रकम को नियमित सरकारी खाते में जमा करने के बजाय कथित सिंडिकेट तक पहुंचाने की व्यवस्था थी। इस पूरी प्रक्रिया से सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने का आरोप लगाया गया है।

15 जिलों में 60.50 लाख पेटियों की बिक्री का दावा

EOW-ACB के आकलन के मुताबिक, शराब घोटाले में कथित अवैध कमाई और राजस्व नुकसान का आंकड़ा 3,076 करोड़ रुपए से अधिक है। जांच एजेंसी ने देशी शराब की पार्ट-A, पार्ट-B और पार्ट-C श्रेणियों से जुड़े 2,545.94 करोड़ रुपए तथा विदेशी शराब की सप्लाई में 281.89 करोड़ रुपए के कथित कमीशन का उल्लेख किया है। आरोप पत्र के अनुसार, 15 जिलों में बिना आबकारी शुल्क चुकाए करीब 60.50 लाख पेटियों की बिक्री किए जाने का आरोप है। इन आंकड़ों के आधार पर एजेंसी ने कथित घोटाले के वित्तीय नेटवर्क की पड़ताल की है। हालांकि, ये आंकड़े जांच एजेंसी के आकलन और आरोपों पर आधारित हैं। मामले में अंतिम निष्कर्ष न्यायालय की सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही निकलेगा।

मैनपावर भुगतान में 182.98 करोड़ की गड़बड़ी का आरोप

शराब घोटाले की जांच के दौरान मैनपावर एजेंसियों को किए गए भुगतान में भी कथित अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। EOW-ACB के मुताबिक, पांच एजेंसियों को ओवरटाइम, बोनस, अतिरिक्त कार्यदिवस और सेवा शुल्क के नाम पर 182.98 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान किए जाने का आरोप है। इसमें से 62.99 करोड़ रुपए कमीशन के रूप में वापस लिए जाने की बात जांच में कही गई है। इस मामले में तत्कालीन छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) के प्रबंध संचालक अरुणपति त्रिपाठी और ईगल हंटर सॉल्यूशन के संचालक बीआर लोहिया की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है।

208 करोड़ रुपए दुबई पहुंचाने के लिए हवाला नेटवर्क का आरोप

जांच एजेंसी ने कथित अवैध कमाई को दुबई पहुंचाने के लिए हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल किए जाने का भी दावा किया है। EOW-ACB के अनुसार, जब्त मोबाइल फोन में मिली एक एक्सेल शीट में 27 मई से 21 जून 2022 के बीच हुए 27 लेन-देन का हिसाब मिलने की बात कही गई है। इसमें सिंडिकेट के सदस्य विकास अग्रवाल उर्फ सुब्बू को दुबई में 208.46 करोड़ रुपए उपलब्ध कराने का उल्लेख होने का दावा किया गया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, कथित नेटवर्क में रायपुर से नकदी मुंबई भेजी जाती थी और वहां जमा रकम के बदले दुबई में स्थानीय संपर्कों के जरिए बराबर राशि उपलब्ध कराई जाती थी। जांच में खंजन ठक्कर के नेटवर्क और दुबई स्थित नोवा स्कोटिया गोल्ड ट्रेडिंग एलएलसी का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि शेल कंपनियों और रियल एस्टेट कारोबार के माध्यम से कथित अवैध कमाई को निवेश के रूप में दिखाने की कोशिश की गई।

यश टुटेजा, अख्तर ढेबर और प्रिंस भाटिया पर क्या आरोप?

पूरक आरोप पत्र में अलग-अलग आरोपियों की कथित भूमिका का विवरण दिया गया है।

  • यश टुटेजा: जांच एजेंसी ने उन पर अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर के बीच संपर्क का माध्यम बनने तथा कथित अवैध रकम को पारिवारिक खातों, जमीन, म्यूचुअल फंड और रियल एस्टेट में निवेश करने का आरोप लगाया है।
  • अख्तर ढेबर: उन पर शेल कंपनियों और रियल एस्टेट फर्मों के जरिए कथित रकम को खपाने में भूमिका निभाने का आरोप है।
  • प्रिंस भाटिया: उन पर डिस्टिलरी में बिना आबकारी शुल्क वाली शराब के उत्पादन, डुप्लीकेट होलोग्राम और कथित अवैध सप्लाई से जुड़ी गतिविधियों में भूमिका निभाने का आरोप लगाया गया है।
  • आशीष श्रीवास्तव: जांच एजेंसी ने उन पर आबकारी व्यवस्था की निगरानी में कथित लापरवाही और अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई नहीं करने के आरोप लगाए हैं।

इसके अलावा छत्तीसगढ़ डिस्टिलरीज, वेलकम डिस्टिलरी, भाटिया वाइन्स मर्चेंट्स और प्रिज्म होलोग्राफी सहित 22 कंपनियों को भी आरोप पत्र में शामिल किया गया है।

27 हजार पन्नों के पूरक चालान से आगे बढ़ेगी न्यायिक प्रक्रिया

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में EOW-ACB की ओर से पेश किया गया 10वां पूरक आरोप पत्र कथित अवैध शराब उत्पादन, सप्लाई, कमीशन वसूली और पैसों के लेन-देन से जुड़े विभिन्न पहलुओं को सामने रखता है।

जांच एजेंसी ने आरोपियों और कंपनियों की कथित भूमिका के संबंध में दस्तावेजी साक्ष्यों का उल्लेख किया है। अब आरोप पत्र में दर्ज आरोपों और प्रस्तुत साक्ष्यों का परीक्षण न्यायालय में होगा। सभी आरोपियों की आपराधिक जिम्मेदारी का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया और अदालत के अंतिम फैसले के आधार पर ही किया जाएगा।

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