दुर्ग में नवरात्रि की धूम: चंडी देवी मंदिर पहुंचीं 30 से ज्यादा चुनरी यात्राएं, 2700 ज्योति कलश से जगमगाया दरबार

दुर्ग में नवरात्रि की धूम: चंडी देवी मंदिर पहुंचीं 30 से ज्यादा चुनरी यात्राएं, 2700 ज्योति कलश से जगमगाया दरबार

दुर्ग। शारदीय नवरात्रि की पंचमी पर दुर्ग शहर माता की भक्ति और आस्था में सराबोर नजर आया। कुलदेवी मां चंडी देवी मंदिर में 30 से अधिक चुनरी यात्राएं पहुंचीं। ढोल-नगाड़ों और जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने माता को चुनरी अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर में इस वर्ष 2700 ज्योति कलश स्थापित किए गए हैं। वहीं, ग्रीन चौक में स्थापित 23 फीट ऊंची मां दुर्गा की प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। नवरात्रि के अवसर पर शहर के प्रमुख मंदिरों और दुर्गा पंडालों में सुबह से ही भक्तों की आवाजाही बनी रही। आकर्षक साज-सज्जा, भव्य प्रतिमाओं और धार्मिक आयोजनों ने पूरे शहर को भक्तिमय बना दिया है।

चंडी देवी मंदिर में पहली बार बड़ी स्क्रीन पर दर्शन

दुर्ग राजपरिवार की कुलदेवी मां चंडी देवी के मंदिर में नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। मंदिर में मां की स्वयंभू स्थापना की मान्यता है। इस बार श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पहली बार मंदिर के बाहर बड़ी स्क्रीन लगाई गई है, ताकि भीड़ अधिक होने पर बाहर मौजूद भक्त भी माता के दर्शन कर सकें। मंदिर के पुजारी गिरधर शर्मा के अनुसार, नवरात्रि के सभी नौ दिनों तक कन्या भोज का आयोजन किया जाता है। प्रतिदिन सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक लगभग 400 से 500 बच्चियां भोजन करती हैं। श्रद्धालुओं को रोजाना अलग-अलग प्रकार का प्रसाद भी वितरित किया जाता है।

51 ज्योति कलश से शुरू हुई परंपरा, अब संख्या 2700

चंडी देवी मंदिर में ज्योति कलश स्थापना नवरात्रि का प्रमुख आकर्षण है। मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार, यहां शुरुआत में 51 ज्योति कलश स्थापित किए जाते थे। समय के साथ श्रद्धालुओं की भागीदारी बढ़ती गई और इस वर्ष इनकी संख्या 2700 तक पहुंच गई है। मंदिर परिसर में प्रज्वलित ज्योति कलश श्रद्धालुओं के लिए आस्था और भक्ति का विशेष केंद्र बने हुए हैं।

ग्रीन चौक में 23 फीट ऊंची प्रतिमा, 51 देवी-देवताओं के स्वरूप

दुर्ग के ग्रीन चौक में पिछले करीब 40 वर्षों से मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करने की परंपरा चली आ रही है। इस वर्ष यहां लगभग 23 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है। प्रतिमा में मां दुर्गा के विराट स्वरूप के साथ 51 देवी-देवताओं के स्वरूप भी दर्शाए गए हैं, जो श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं।

बनियापारा और सदर बाजार में भी भव्य प्रतिमाएं

बनियापारा में महाराष्ट्र के साकोली में तैयार की गई मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई है। यहां पिछले 36 वर्षों से प्रतिमा स्थापना की परंपरा निभाई जा रही है। वहीं, सदर बाजार रोड पर बीकानेर की आराध्य कुलदेवी करणी माता की प्रतिमा स्थापित की गई है। संबंधित समिति तीन दशक से अधिक समय से प्रतिमा स्थापना करती आ रही है।

इंदिरा मार्केट में अनोखी प्रतिमा, ढीमरा पारा में विशाल शेर आकर्षण

इंदिरा मार्केट रोड पर स्थापित मां दुर्गा की प्रतिमा अपनी अनूठी बनावट के कारण चर्चा में है। इसकी संरचना ऐसी है कि दूर से देखने पर प्रतिमा हवा में लटकी हुई प्रतीत होती है। दूसरी ओर, ढीमरा पारा में मां दुर्गा के साथ स्थापित विशाल शेर की प्रतिमा भी श्रद्धालुओं और दर्शनार्थियों का ध्यान खींच रही है। शहर के विभिन्न पंडालों में आकर्षक सजावट और कलात्मक प्रतिमाओं के जरिए नवरात्रि उत्सव को विशेष रूप दिया गया है।

तरीघाट के महामाया मंदिर में त्रिमूर्ति की मान्यता

दुर्ग जिले के पाटन विकासखंड में खारुन नदी के किनारे स्थित तरीघाट गांव का प्राचीन मां महामाया मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां मां महामाया, महालक्ष्मी और महासरस्वती की त्रिमूर्ति को स्वयंभू मानने की परंपरा है। मंदिर के गुंबद पर बनी नागदेवता की आकृति इसकी विशिष्ट पहचान है। स्थानीय ग्रामीण नागदेवता को मंदिर के रक्षक के प्रतीक के रूप में देखते हैं। चैत्र और क्वार नवरात्रि के दौरान यहां भी ज्योति कलश स्थापित किए जाते हैं।

सुरक्षा और यातायात के लिए पुलिस तैनात

नवरात्रि में मंदिरों और चुनरी यात्राओं में बढ़ती भीड़ को देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था की है। एएसपी मणि शंकर चंद्रा के अनुसार, करीब 100 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। चुनरी यात्रा समितियों को निर्धारित मार्ग और समय का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि शहर में यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो। नवरात्रि की पंचमी पर दुर्ग में चुनरी यात्राओं, ज्योति कलशों की रोशनी और भव्य दुर्गा प्रतिमाओं ने धार्मिक उत्सव की रौनक बढ़ा दी। मंदिरों से लेकर प्रमुख चौक-चौराहों तक माता के जयकारे गूंजते रहे और श्रद्धालु दर्शन-पूजन में जुटे रहे।

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