
पाटन। ब्लॉक मुख्यालय पाटन के अंतिम छोर पर खारून नदी के किनारे बसे ग्राम तरीघाट में वर्षों से मुक्तिधाम की समस्या बनी हुई है। गांव में वर्तमान में एक भी सरकारी मुक्तिधाम नहीं होने के कारण ग्रामीणों को मृतकों का अंतिम संस्कार खुले आसमान के नीचे अथवा वैकल्पिक टीन शेड में करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। बारिश के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में कई आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं, लेकिन अंतिम संस्कार जैसी बेहद जरूरी व्यवस्था का अभाव चिंता का विषय है। उनका कहना है कि व्यक्ति को अंतिम विदाई भी सम्मानजनक और सुरक्षित वातावरण में मिलनी चाहिए, लेकिन मुक्तिधाम के अभाव में परिजनों को मौसम की विपरीत परिस्थितियों के बीच अंतिम संस्कार करना पड़ता है।
जर्जर मुक्तिधाम को किया गया था डिस्मेंटल
ग्रामीणों के अनुसार, गांव में पहले से निर्मित मुक्तिधाम काफी जर्जर हो चुका था। भवन की स्थिति ऐसी थी कि कभी भी दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती थी। इसके चलते तत्कालीन ग्राम पंचायत ने प्रस्ताव पारित कर निर्धारित दावा-आपत्ति प्रक्रिया पूरी करने के बाद पुराने मुक्तिधाम को डिस्मेंटल कर दिया था। इसके बाद ग्राम पंचायत के पूर्व पदाधिकारियों द्वारा मनरेगा योजना के तहत नए मुक्तिधाम एवं प्रतीक्षालय निर्माण का प्रस्ताव शासन-प्रशासन के समक्ष रखा गया। हालांकि, वर्षों बीत जाने के बाद भी स्थायी मुक्तिधाम का निर्माण नहीं हो सका है।
बरसात में सबसे ज्यादा परेशानी
तरीघाट बड़ी आबादी वाला गांव है। वर्तमान में वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर टीन शेड में अंतिम संस्कार किया जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक यह व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। बारिश के दौरान टीन शेड भी पूरी तरह राहत नहीं दे पाता, जबकि गर्मी में तेज धूप के कारण भी लोगों को परेशानी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि मुक्तिधाम निर्माण को लेकर पंचायत और जनप्रतिनिधियों के माध्यम से कई बार शासन-प्रशासन को आवेदन एवं निवेदन किया जा चुका है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
पंचायत ने फिर रखी निर्माण की मांग
ग्राम पंचायत की ओर से मुक्तिधाम एवं प्रतीक्षालय निर्माण के लिए मनरेगा योजना के तहत प्रस्ताव भेजे जाने की बात कही गई है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि शासन स्तर से जल्द स्वीकृति मिलने के बाद गांव में स्थायी मुक्तिधाम का निर्माण हो सकेगा। ग्रामीणों का कहना है कि मुक्तिधाम कोई विलासिता नहीं, बल्कि गांव की आवश्यक मूलभूत सुविधा है। शासन-प्रशासन को इस समस्या को प्राथमिकता देते हुए जल्द निर्माण की स्वीकृति देनी चाहिए, ताकि ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के दौरान होने वाली परेशानियों से राहत मिल सके।
अशोक साहू, पूर्व सरपंच, ग्राम पंचायत तरीघाट:
“पूर्व में निर्मित मुक्तिधाम अत्यधिक जर्जर हो गया था और कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती थी। इसी वजह से ग्राम पंचायत में प्रस्ताव लाकर निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे डिस्मेंटल किया गया था। नए मुक्तिधाम के निर्माण के लिए भी प्रस्ताव रखा गया था।”
चंद्रिका साहू, सरपंच, ग्राम पंचायत तरीघाट:
“वर्तमान में गांव में सरकारी मुक्तिधाम नहीं होने के कारण ग्रामीणों को खुले आसमान के नीचे अंतिम संस्कार करना पड़ता है। वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में टीन शेड में दाह संस्कार किया जा रहा है। समस्या के समाधान के लिए शासन-प्रशासन को अवगत कराया गया है और लगातार आवेदन-निवेदन किए जा रहे हैं। मनरेगा के तहत मुक्तिधाम एवं प्रतीक्षालय निर्माण की मांग रखी गई है।”