दुर्ग के 244 गांवों में 45,795 लोगों को मिला जमीन का मालिकाना हक: ड्रोन-GIS सर्वे से बने ई-पट्टे, बोरी तहसील में 100% काम पूरा, सासंद विजय बघेल ने किया वितरण

दुर्ग के 244 गांवों में 45,795 लोगों को मिला जमीन का मालिकाना हक: ड्रोन-GIS सर्वे से बने ई-पट्टे, बोरी तहसील में 100% काम पूरा, सासंद विजय बघेल ने किया वितरण

दुर्ग। जमीन की नपाई और आबादी भूमि के मालिकाना हक को लेकर होने वाले विवादों से ग्रामीणों को राहत मिलने लगी है। केंद्र और राज्य सरकार की स्वामित्व योजना के तहत दुर्ग जिले में ड्रोन और GIS तकनीक के जरिए ग्रामीण आबादी क्षेत्रों का सर्वे कर अधिकार अभिलेख यानी ई-पट्टे तैयार किए जा रहे हैं। योजना शुरू होने से अब तक जिले के 244 गांवों के 45,795 हितग्राहियों को उनके मकान और आबादी भूमि का मालिकाना हक मिल चुका है। प्रशासन के मुताबिक सर्वे और रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया अभी भी जारी है।

चालू राजस्व वर्ष में 27,707 लोगों के ई-पट्टे तैयार

1 अक्टूबर 2025 से शुरू हुए चालू राजस्व वर्ष में ही जिले के 162 गांवों के 27,707 हितग्राहियों के ई-अधिकार अभिलेख तैयार कर अंतिम रूप से प्रकाशित किए जा चुके हैं। इनमें पाटन के 55 गांवों के 10,364, धमधा के 55 गांवों के 5,448, अहिवारा के 14 गांवों के 5,283, दुर्ग के 18 गांवों के 4,877 और बोरी तहसील के 20 गांवों के 1,735 हितग्राही शामिल हैं।

बोरी तहसील में आबादी पट्टा रिकॉर्ड का काम 100% पूरा

कलेक्टर अभिजीत सिंह के मुताबिक स्वामित्व योजना के तहत बोरी तहसील ने जिले में नया कीर्तिमान बनाया है। तहसील के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी पट्टा अभिलेख तैयार करने का काम पूरा कर लिया गया है। बोरी तहसील के ग्राम मड़ियापार की निवासी देविका बाई को 103.26 वर्ग मीटर भूमि का पट्टा मिला है। प्रशासन के मुताबिक इससे उन्हें अपनी संपत्ति पर कानूनी अधिकार का दस्तावेज मिल गया है।

GIS प्रशिक्षण से दूर हुई तकनीकी अड़चन

स्वामित्व योजना के तहत सर्वे ऑफ इंडिया और भू-अभिलेखागार के बीच अनुबंध खत्म होने के कारण शुरुआती दौर में नक्शा सुधार का काम प्रभावित हुआ था। इसके बाद जिला प्रशासन ने पटवारियों और राजस्व निरीक्षकों को ArcGIS सॉफ्टवेयर का 15 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण दिलाया। प्रशिक्षण के बाद नक्शों से संबंधित कार्य और दावा-आपत्तियों के निराकरण की प्रक्रिया को जिला और तहसील स्तर पर आगे बढ़ाया गया। इससे रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया में तेजी आई। भिलाई-3 पूर्णतः नगरीय क्षेत्र होने के कारण स्वामित्व योजना के दायरे में शामिल नहीं है।

सेवा संकल्प अभियान में बांटे जा रहे पट्टे

वर्तमान में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चल रहे सेवा संकल्प अभियान के दौरान जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में ग्रामीणों को स्वामित्व योजना के पट्टे वितरित किए जा रहे हैं। गुरुवार को सतनाम भवन, पाटन में आयोजित संकल्प अभियान शिविर में सांसद और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में स्वामित्व योजना के पट्टों सहित विभिन्न हितग्राहीमूलक योजनाओं का लाभ वितरित किया गया।

जमीन का दस्तावेज मिलने से क्या होगा फायदा?

अधिकार अभिलेख मिलने के बाद ग्रामीणों के पास उनकी आबादी भूमि और मकान का आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध होगा। प्रशासन के मुताबिक इससे संपत्ति से जुड़े विवादों में कमी, जमीन की पहचान और रिकॉर्ड संबंधी प्रक्रिया में सुविधा के साथ पात्र हितग्राहियों को बैंकिंग और ऋण संबंधी कार्यों में भी मदद मिल सकती है। स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन सर्वे और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से ग्रामीण आबादी की संपत्तियों का रिकॉर्ड व्यवस्थित करने की प्रक्रिया को भी मजबूती मिल रही है।

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