
रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की राज्य सेवा परीक्षा-2024 और 2025 को लेकर राजनीतिक विवाद फिर तेज हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 2024 की परीक्षा की दोबारा जांच कराने और 2025 की मुख्य परीक्षा के बाद होने वाले इंटरव्यू को जांच पूरी होने तक रोकने की मांग की है। उन्होंने 2025 की परीक्षा के मूल्यांकन की भी जांच कराने की मांग की है और कहा है कि गड़बड़ी मिलने पर परीक्षा निरस्त कर नई प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए। भूपेश बघेल ने 2024 की मुख्य परीक्षा की उत्तर-पुस्तिकाओं के मूल्यांकन को लेकर सामने आई शिकायतों का हवाला देते हुए सवाल उठाए। उनका दावा है कि कुछ उत्तर-पुस्तिकाओं में सही उत्तर देने वाले अभ्यर्थियों को कम और गलत उत्तर देने वालों को अधिक अंक मिलने की शिकायतें सामने आई हैं।
265 पदों पर 608 अभ्यर्थियों का इंटरव्यू
CGPSC ने राज्य सेवा परीक्षा-2025 के तहत 20 सेवाओं के कुल 265 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी। मुख्य परीक्षा के परिणाम के बाद 608 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए चयनित किया गया है। इंटरव्यू 21 सितंबर 2026 से शुरू होने की जानकारी दी गई है।
भूपेश बघेल ने इसी आंकड़े को लेकर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि 265 पदों के लिए तीन गुना के अनुपात में 795 अभ्यर्थियों का इंटरव्यू होना चाहिए था, जबकि 608 अभ्यर्थी ही अगले चरण तक पहुंचे। हालांकि CGPSC ने इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि 795 की संख्या केवल तीन गुना के आधार पर निकलती है। आयोग के अनुसार जिन अभ्यर्थियों ने निर्धारित न्यूनतम अर्हकारी अंक हासिल नहीं किए, उन्हें इंटरव्यू के लिए चिन्हित नहीं किया गया। इसी वजह से पात्र अभ्यर्थियों की संख्या 608 रही।
187 अभ्यर्थियों को लेकर मांगा जवाब
भूपेश बघेल ने सवाल किया कि यदि 187 अभ्यर्थी न्यूनतम अर्हकारी अंक हासिल नहीं कर सके तो इसकी वजह स्पष्ट की जानी चाहिए। उन्होंने इंटरव्यू से पहले अभ्यर्थियों की उत्तर-पुस्तिकाएं उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके। इसी मुद्दे पर कांग्रेस की ओर से भी आयोग की पारदर्शिता और मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस ने मांग की है कि उत्तर-पुस्तिकाओं को सार्वजनिक किया जाए और अभ्यर्थियों को मूल्यांकन से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं।
2024 की परीक्षा में मूल्यांकन पर आरोप
भूपेश बघेल ने 2024 की मुख्य परीक्षा की उत्तर-पुस्तिकाओं के मूल्यांकन को लेकर सामने आई शिकायतों की जांच की मांग की है। कांग्रेस की ओर से मूल्यांकनकर्ताओं की योग्यता, गोपनीयता और अंक देने की प्रक्रिया से संबंधित भी आरोप लगाए गए हैं। बघेल का कहना है कि यदि 2024 की परीक्षा के मूल्यांकन पर सवाल उठ रहे हैं तो 2025 की परीक्षा के परिणाम और इंटरव्यू प्रक्रिया को लेकर भी पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है।
उत्तर-पुस्तिकाएं सार्वजनिक करने और पुनर्मूल्यांकन की मांग
पूर्व मुख्यमंत्री ने अभ्यर्थियों की उत्तर-पुस्तिकाएं उपलब्ध कराने, मूल्यांकनकर्ताओं के चयन के स्पष्ट मानदंड तय करने और मुख्य परीक्षा के मॉडल उत्तर जारी करने की मांग की है। उन्होंने पुनर्मूल्यांकन की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि 2025 की परीक्षा की जांच पूरी होने तक इंटरव्यू की प्रक्रिया रोक दी जानी चाहिए। यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो परीक्षा को निरस्त कर नई प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए।
21 सितंबर से इंटरव्यू प्रस्तावित
CGPSC के अनुसार राज्य सेवा मुख्य परीक्षा-2025 का आयोजन 6 से 9 जून 2026 के बीच हुआ था। मुख्य परीक्षा के लिए 3,921 अभ्यर्थी चिन्हित किए गए थे और परिणाम के बाद 608 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए चयनित किया गया। इंटरव्यू 21 सितंबर 2026 से शुरू होने की जानकारी दी गई है।
अब परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठे राजनीतिक और अभ्यर्थियों से जुड़े सवालों के बीच आयोग की आगामी कार्रवाई पर नजर रहेगी। विवाद का एक प्रमुख बिंदु यह है कि 265 पदों के लिए 608 अभ्यर्थियों का चयन आयोग के नियमों के अनुरूप कैसे हुआ, जबकि तीन गुना गणना से संख्या 795 बनती है। आयोग का पक्ष है कि न्यूनतम अर्हकारी अंक हासिल नहीं करने वाले अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए शामिल नहीं किया जा सकता।